किरोरी माल कॉलेज एलुमनी मीट में यादों की फिर से चमक, शहर की सुविधाओं पर सवाल उभरा
दिल्ली के उत्तर पश्चिम में स्थित किरोरी माल कॉलेज (केएमसी) ने इस वर्ष अपनी वार्षिक एलुमनी मीट का आयोजन अशोका लॉन्स, दिल्ली यूती में किया। दो-दशकों से अधिक समय बाद लौटे पूर्व छात्रों ने कैंपस के बागों, पुरानी लाइब्रेरी और हॉल में फिर से कदम रखा, जिससे एक साझा मंच पर मित्रता और छात्र जीवन की खुशगवार यादों की अदला‑बदली हुई।
इवेंट की शुरुआत कॉलेज के निदेशक ने एक संक्षिप्त भाषण से की, जिसमें उन्होंने शैक्षणिक मूल्यों और संस्थागत परम्पराओं को दोबारा स्थापित करने का महत्व बताया। इसके बाद नवीनतम ‘वॉल ऑफ फेम’ का अनुष्ठानिक उद्घाटन हुआ, जिसमें पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को इंच‑इन‑इंच पैनल में दिखाया गया। इस पहल को कई ने संस्थागत पहचान को दृढ़ करने के रूप में सराहा, लेकिन यह सवाल भी उठाया गया कि ऐसी संरचनाओं के रख‑रखाव की जिम्मेदारी किसके पास है – कॉलेज, विश्वविद्यालय या नगर निगम की।
एलुमनी मीट के दौरान कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्थानीय बैंड, नृत्य समूह और कवि सभा ने मंच सजाया। दर्शकों में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों और युवा छात्रों ने इस बात पर तंज उड़ाया कि समान कार्यक्रमों के लिये अक्सर अस्थायी धूप‑छाया वाले टेंट और ध्वनि उपकरण शहर की विभागीय अक्षम्यताओं के कारण देर से पहुँचते हैं। एक प्रतिभागी ने हँसते हुए कहा, “समय पर लाइटिंग नहीं मिलती तो हम अपने ‘आकाशीय नोट’ को भी उजागर नहीं कर पाते।” इस प्रकार की व्यंग्यात्मक टिप्पणी, नगर निगम की इवेंट‑सेवा के निरंतर विलंब को उजागर करती है।
अशोका लॉन्स, जहाँ यह समारोह आयोजित हुआ, शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थल रख‑रखाव का एक परीक्षणस्थल बन गया। कई अभ्यागतों ने बताया कि इवेंट के दिन भी बाथरूम की सफाई अपर्याप्त थी, कचरा डिब्बे देर से खाली किये गये और पार्किंग की व्यवस्था में भी अड़चनें आईं। इन समस्याओं को हल करने के लिये नगर निगम के प्रतिनिधियों की उपस्थिति नहीं थी, जिससे यह सवाल उठता है कि सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित निजी‑सार्वजनिक कार्यक्रमों में जिम्मेदारी कैसे बाँटी जानी चाहिए।
एलुमनी मीट के समापन में, कई पूर्व छात्र ने अपने पेशेवर अनुभवों को साझा कर, सामाजिक उद्यम, टेक स्टार्ट‑अप और सार्वजनिक नीति में योगदान के बारे में बताया। उन्होंने भारतीय शहरी विकास की चुनौतियों, विशेषकर बुनियादी ढांचे के अभाव को भी सामने रखा। एक प्रौद्योगिकी उद्यमी ने कहा, “यदि किसी भी शहर को स्मार्ट बनना है, तो उसके बुनियादी सुविधाओं की जड़ें मजबूत होनी चाहिए; नहीं तो ‘अभ्यर्थी’ बनगे।” इस प्रकार के बिंदु, शहरी प्रशासन के प्रति गंभीर प्रश्न उठाते हैं, जबकि सामाजिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित करते हैं।
कुल मिलाकर, किरोरी माल कॉलेज का एलुमनी मीट पुरानी यादों की पुनःजगाने का मंच रहा, परन्तु यह भी स्पष्ट कर गया कि दिल्ली के कई सार्वजनिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव अभी भी एक वास्तविक समस्या है। आयोजनकर्ताओं ने भविष्य में बेहतर सहयोग और समयबद्ध municipal services की आशा व्यक्त की, जबकि नगर निगम से तत्परता और जवाबदेही की मांग की।
Published: May 6, 2026