केजीएमयू ने खराब लिथोट्रिप्सी मशीन पर नोटिस जारी, इलाज में बाधा
लखनऊ – किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने अपने प्रमुख नेफ्रोलॉजी विभाग में स्थापित लिथोट्रिप्सी मशीन की पूर्णतः अकार्यक्षमता को लेकर आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। यह नोटिस उस समय जारी किया गया, जब कई मरीजों ने इस मशीन के खराब रहने के कारण अपने उपचार में अनावश्यक देरी और अतिरिक्त खर्च की शिकायतें कीं।
लिथोट्रिप्सी, यानी किडनी स्टोन का गैर-आक्रामक उपचार, की अपेक्षित सफलता दर के बीच केजीएमयू के इस उपकरण की निरंतर खराबी ने न केवल रोगीयों के स्वास्थ्य को जोखिम में डाला, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने इस विषय में तत्काल कार्यवाही का आग्रह किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट मरम्मत योजना नहीं सामने आई है।
दुर्भाग्यवश, इस मशीन की विफलता के पीछे तकनीकी कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, “उपकरण पुरान हो चुका है, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता में समस्या है और पुनः खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही है”। यहाँ तक कि सामान्य कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रस्तावित बजट को भी आगे बढ़ाने में जामीनदारियों की कमी के कारण अटकाव का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों के इस आघात को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है – एक तो इलाज के लिए अतिरिक्त यात्रा और निजी क्लिनिक पर अधिक खर्च, और दूसरा मानसिक तनाव। कई रोगियों ने सामाजिक मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अपनी असंतुष्टि व्यक्त की, लेकिन लेख के स्वर में यह देखते हुए, यह स्पष्ट है कि प्रशासन ने पहले ही रोगियों के शिकायतों को औपचारिक रूप में दर्ज किया है।
इस संदर्भ में, स्थानीय नगर निगम और राज्य स्वास्थ्य विभाग दोनों से अपेक्षा है कि वे इस तकनीकी कमी को जल्द से जल्द दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएँ। सार्वजनिक निधि से चल रहे स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी बुनियादी उपकरणों की निरंतर देखभाल और अद्यतन नीतियों की कमी, प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देती है।
समाप्ति में, यह घटना स्वास्थ्य सेवा प्रसाद में बुनियादी ढाँचे की निरंतर देखभाल के महत्व को दोबारा याद दिलाती है। यदि केजीएमयू जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान अपने उपकरणों के रखरखाव में सुधार नहीं लाते, तो नागरिकों को भविष्य में और अधिक कष्ट और आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है।
Published: May 6, 2026