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कांग्रेस ने पंजाब के ‘ड्रग जनगणना’ को बताया निजता उल्लंघन का खतरा

नई दिल्ली – केंद्रीय कांग्रेस दल ने आज बीते दोपहर पंजाब सरकार द्वारा घोषित ‘ड्रग जनगणना’ के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा को बड़े पैमाने पर एकत्रित किया जाएगा, जिससे निजता के अधिकारों का संभावित उल्लंघन हो सकता है।

पंजाब सरकार ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि वह राज्य भर में नशा सेवन, तस्करी और संबंधित अपराधों पर अधिक सटीक आंकड़े इकट्ठा करने के लिए एक तकनीकी‑सक्षम सर्वेक्षण आयोजित करेगी। अधिकारी यह दावा करते हैं कि यह डेटा‑ड्रिवेन नीति दवाओं के दबाव को कम करने, पुनर्वास कार्यक्रमों को बेहतर बनाने और कानून प्रवर्तन को कुशल बनाने में मदद करेगी।

कांग्रेस ने इस कदम को ‘डेटा माइनिंग’ की सम्भावित दुष्प्रभावों की चेतावनी दी, जिसमें अनुचित प्रोफाइलिंग, निगरानी, और सामाजिक कलंक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी आधार के, व्यक्तिगत जानकारी को एकत्रित कर संग्रहित करना न केवल संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध है, बल्कि भविष्य में बहु‑सिर्कारी या निजी संस्थाओं द्वारा दुरुपयोग की राह खोल सकता है।

राज्य के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी और पुलिस परराष्ट्र विभाग ने परियोजना के संचालन में डेटा सुरक्षा उपायों को लागू करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सभी जानकारी को एन्क्रिप्टेड सर्वर पर रखा जाएगा और केवल निर्दिष्ट प्राधिकरणों के पास ही पहुंच होगी। परन्तु कांग्रेस के प्रतिनिधि इस आश्वासन को “सुव्यवस्थित शब्दावली के साथ लपेटा गया एक सामान्य मामला” कह कर खारिज कर रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर भी इस योजना को लेकर हिचकिचाहट दिख रही है। कई नागरिक संगठनों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में विशेषकर शहरी‑पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में डेटा संग्रह के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ एवं शुद्धता नहीं है, जिससे गलत डेटा एंट्री की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, सामाजिक ताने‑बाने में पहले से मौजूद तनाव के साथ अतिरिक्त निगरानी की भावना से जनता में असहजता पैदा हो रही है।

राजनीतिक विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि यह “ड्रग जनगणना” एक दोधारी तलवार है: जबकि यह नशा नियंत्रण के लिए उपयोगी डेटा प्रदान कर सकती है, लेकिन बिना पारदर्शी निगरानी और स्पष्ट उपयोग‑नीति के, यह राज्य‑संकेंद्रित निगरानी का पूर्ववर्ती बन सकती है। इस बीच, कई शहरी मध्य‑वर्गीय घराने के सदस्य चिंतित हैं कि निजी स्वास्थ्य जानकारी अनजाने में सार्वजनिक डोमेन में लीक हो सकती है, जिससे सामाजिक कलंक और रोजगार‑संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

कांग्रेस ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह जनगणना के दायरे, डेटा संग्रहण के तकनीकी उपाय, एवं डेटा रखरखाव की समय सीमा को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे। वे यह भी माँग रहे हैं कि एक स्वतंत्र डेटा‑सुरक्षा ऑडिट स्थापित किया जाए जिससे इस प्रक्रिया की वैधता और सुरक्षा का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन हो सके।

पंजाब सरकार अभी तक इस मांग पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दे पाई है, परंतु अगले सप्ताह एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का संकेत दिया गया है, जहाँ नीति निर्माताओं, डेटा‑सुरक्षा विशेषज्ञ और सामाजिक हितधारकों को आमंत्रित किया जाएगा। इस सुनवाई में यह देखना होगा कि क्या ‘ड्रग जनगणना’ के आश्वासनों को व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकेगा, या यह केवल एक अधिकारिक कागज़ात बन कर रह जाएगा।

Published: May 4, 2026