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केएमपी एक्सप्रेसवे पर तेज़ी से चलती पुलिस कार का टक्कर, चार यूपी पुलिस कर्मचारी और एक नागरिक मार गए

कुंदली‑मानेसर‑पालवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर आज सुबह एक घातक सड़क दुर्घटना हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस के चार अधीक्षक स्तर के अधिकारी और एक शिकायतकर्ता, जो एक अपहरण मामले की जांच के लिए राइॅड पर जा रहे थे, अपने तेज़ गति वाले स्कॉर्पियो में एक पार्क की हुई ट्रक से टकरा कर तुरंत क्षतिग्रस्त हो गए। सभी पाँच सवारों की मृत्यु का आँकड़ा तुरंत पुष्टि हो गया।

घटना की प्राथमिक जांच से पता चलता है कि स्कॉर्पियो ने ओवरटेक करने के प्रयास में अनधिकृत रूप से रोक रखी हुई ट्रक को टक्कर मार दी। ट्रक, जो हाईवे के दक्षिणी किनारे पर अवैध रूप से खड़ी थी, पुलिस वाहन की अति गति और ओवरटेक की अराजक योजना का शिकार बन गई। दुर्घटना स्थल पर तेज़ी से निकासी के बाद, स्थानीय बोर्डिंग पोस्टर ने बताया कि उपाय के अभाव में ट्रक का अवरोधन रॉड पर रह गया था, जिससे तेज़ चलने वाले वाहनों के लिए खतरे की संभावना बढ़ गई।

उत्तीर्ण में इस घटना से प्रशासन की दो तरफ़ी ज़िम्मेदारियाँ सामने आती हैं। एक ओर, पुलिस विभाग को अपने अभियानों में उच्च गति वाले वाहनों के प्रयोग के लिये स्पष्ट नियम बनाना होगा, विशेषकर जब वे राष्ट्रीय राजमार्गों पर कार्य कर रहे हों। दूसरी ओर, हाइडरोग्राफिक और ट्रांसपोर्ट विभाग को हाईवे पर अवैध पार्किंग को रोकने के लिए सख्त निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। इस दुर्घटना में दिखेगा कि बुनियादी ढांचा उपेक्षा और प्रोटोकॉल की अनदेखी कैसे साधारण नागरिकों को भी मार्मिक कीमत चुकाने को मजबूर कर देती है।

हिंतु, इस त्रासदी के बाद राज्य प्रशासन ने तुरंत एक महिला एवं बाल मामलों की जांच बोर्ड बनाकर 10 दिन में विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। पुलिस इंटेलिजेंस और हाईवे सुरक्षा विभाग के बीच समन्वय को सुधारने के लिए एक विशेष कार्यसमिति का गठन किया गया है। साथ ही, मृतकों के परिवारों को उचित क्षतिपूर्ति और परिजन सहायता प्रदान करने के लिये सामाजिक कल्याण विभाग को निर्देशित किया गया है।

सड़क सुरक्षा के इस दुरुपयोग में नागरिकों की प्रतिक्रिया भी गहरी है। सोशल मीडिया पर संक्षिप्त लेकिन तेज़ टिप्पणी इसके पीछे की प्रणालीगत कमियों को उजागर करती है— "पुलिस की रेस, नागरिक की मौत"—विचारधारा के इस परिप्रेक्ष्य में सरकारी नीतियों की पूछताछ को तीव्रता मिलती है। इस प्रकार, केएमपी एक्सप्रेसवे पर हुई यह दुर्घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि सार्वजनिक प्रशासन, ट्रैफ़िक प्रबंधन और पुलिस संचालन के बीच मौजूद अंतराल का स्पष्ट संकेत भी है।

Published: May 6, 2026