के.एम.पी एक्सप्रेसवे पर तेज़ ओवरटेक में 5 यूपी पुलिसकर्मी मारे गए
नूह जिले के धुलावत टोल प्लाज़ा के पास के.एम.पी एक्सप्रेसवे पर मंगलवार दोपहर 10.30 बजे एक औद्योगिक एसयूवी तेज़ ओवरटेक करने के प्रयास में नियंत्रण खोकर एक अन्य गाड़ी से टकरा गई। इस दुर्घटना में उसके अंदर सवार पाँच उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मी तुरंत हेमा हो गए, जिनमें चार की पहचान उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने की है।
आवागमन के इस प्रमुख शहरी हाईवे पर टकराव से वाहन बिखर गया और सभी यात्रियों को फँसा कर रख दिया। स्थानीय एएमटी (ऑफिसर) और अग्निशमन दल को सूचित कर लंबी बचाव कार्यवाही शुरू की गई। अंततः सभी पीड़ितों को तुरंत ही पहचान कर अस्पताल पहुंचाया गया, परन्तु सबकी मौत घटना स्थल पर ही तय हो गई।
हैरान करने वाली बात यह है कि दुर्घटना का मुख्य कारण तेज़ गति से किया गया ओवरटेक बताया गया है—ऐसी मनोवृत्ति जो अक्सर एक्सप्रेसवे पर ‘समय पर पहुँचने’ के बहाने बहस बनती है। इस घटना ने फिर से यह प्रश्न उठाया है कि वर्तमान में गति सीमा नियमों की किस हद तक प्रभावशीलता है और किन उपायों से ऐसी त्रासदी को रोका जा सकता है।
हैराण पुलिस अधीक्षक ने कहा कि घटना के बाद तुरंत फाइलिंग की गई है; एफआईआर दर्ज की गई और दुर्घटना स्थल की साक्षीगिरी वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने एक्सप्रेसवे पर गति नियंत्रण कैमरों की जाँच कराने का आदेश दिया है, जो गवाहों के अनुसार पहले से ही ‘सिस्टम में भ्रष्टाचार’ की हवा में चल रहे थे।
यह दुर्घटना न केवल उत्तर प्रदेश पुलिस बल को एक बड़ा झटका है, बल्कि उन कई परिवारों को भी गहरा सदमा पहुँचा रही है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को एक ही क्षण में खो दिया। प्रशासनिक अधिकारी इस बात पर बल दे रहे हैं कि पुलिस कर्मियों की यात्रा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, परन्तु कि वे अपने ही नियमों को उल्लंघन करते हुए तेज़ी से चल रहे थे, यह सवाल अभी भी बना है।
एक कठोर लेकिन जरूरी निष्कर्ष यह निकला है कि जब ‘तेज़ गति’ आम बनती जा रही है, तो उससे जुड़े “उम्मीद की सीमा” भी कमज़ोर हो रही है। सड़कों पर अनुशासन की कमी, गति सीमा की अनदेखी, और समय‑सीमा से अधिक तेज़ी का निरंतर चलना—इन सबको मिलकर एक ‘सिस्टम त्रुटि’ के रूप में पहचाना जाना चाहिए, न कि केवल व्यक्तिगत लापरवाही के रूप में।
राज्य सरकार ने कहा है कि इस पर व्यापक जांच की जाएगी और इसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसमें एक्सप्रेसवे पर रीयल‑टाइम गति निगरानी, ड्राइवर प्रशिक्षण, तथा कठोर दण्डात्मक प्रावधान शामिल हो सकते हैं। परन्तु यह स्पष्ट है कि सिर्फ़ ‘जांच’ शब्द ही पर्याप्त नहीं—भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचाव के लिये ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
Published: May 5, 2026