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ओडिशा में सुधारी गई सुभद्रा योजना: 61 करोड़ रुपये 79,000 बंचित महिलाओं को वितरित

उपमुख्यमंत्री प्रवती परीदा ने आज 5 मई को लगभग 61 करोड़ रुपये की राशि को सीधे लाभ‑स्थानान्तरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के रूप में 79,000 से अधिक महिलाओं को प्रदान किया। ये वे महिलाएँ थीं जिन्हें तकनीकी गड़बड़ी और सत्यापन की उलझन के कारण पहले योजना से बाहर रखा गया था।

सुभद्रा योजना, जो राज्य के महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लक्ष्य बनाती है, पिछले दो वर्षों में कई बार डेटा‑प्रक्रिया में त्रुटियों और ऑन‑बोर्डिंग के देरी का शिकार रही। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अनुप्रयुक्त तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया में ‘भ्रष्टाचार-संगत’ लापरवाही से कई परिवारों को बाहर रखा गया। इस बार दिये गये भुगतान को “पेंडिंग केस क्लियरेंस” के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे प्रशासनिक लापरवाही को सुधारने का मंच तैयार हो गया।

प्रवती परीदा ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह है कि हर पात्र महिला को बिना किसी बाधा के वित्तीय सहायता मिले। आज का यह कदम उस प्रतिबद्धता को साकार करता है।” टिप्पणी में उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी तकनीकी गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक समर्पित निगरानी इकाई बनाई जाएगी।

हालाँकि यह कदम प्रशंसनीय है, पर इस घटना ने राज्य‑स्तरीय डेटा‑प्रबंधन के ढाँचे की कमजोरी को उजागर किया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि लाभ‑स्थानान्तरण प्रणाली में वास्तविक‑समय सत्यापन और पारदर्शी रिकॉर्ड‑कीपिंग की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ‘छूटे‑हुए लाभार्थी’ जैसी स्थितियों को दोहराया न जा सके।

बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य देखभाल या छोटे व्यापारों में निवेश करने की संभावनाओं को देखे तो यह हस्तक्षेप स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिशीलता को बढ़ावा दे सकता है। परन्तु लाभ के वास्तविक प्रभाव को मापने के लिए आगे की निगरानी और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया संग्रह आवश्यक रहेगा।

सारांश में, ओडिशा सरकार ने तकनीकी अड़चनों के बाद कई महीनों के बहस के बाद 61 करोड़ रुपये की राशि को बंचित महिलाओं तक पहुँचा दिया है। यह कदम न केवल तत्काल वित्तीय राहत प्रदान करता है, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में अनिवार्य चिंतन को भी प्रेरित करता है।

Published: May 5, 2026