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ओडिशा में रेल पुलिस कांस्टेबल की बर्बर हत्या पर परिवार ने पुलिस की उदासीनता पर लगाया सवाल

ओडिशा में एक रेल पुलिस कांस्टेबल पर भीड़ द्वारा किए गए लिंचिंग घाव के बाद, मृत शरीर को अस्पताल पहुँचाने हेतु कोई एंबुलेंस नहीं उपलब्ध करवाई गई, ऐसा परिवार ने आरोप लगाते हुए कहा। इस घटना में उपस्थित पुलिस अधिकारियों के निस्तेज रहने को लेकर परिवार ने तत्काल निलंबन की मांग की है।

घटनास्थल पर कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे, परन्तु प्रतिवादियों ने बताया कि वे बस ज़रूरतमंदों के भीड़ को देखते रहे और कब्ज़ा किया कि “किसी को सर्जिकल भूमिका नहीं मिली”। मृत कांस्टेबल को घातक चोटें लगने के बाद भी, उसका इलाज हेतु एंबुलेंस बुलाने की पहल नहीं हुई, जिससे उसकी मृत्युदर औसत से अधिक हो गया।

परिवार के प्रमुख ने कहा, “यदि तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जाती, तो संभवतः मौत से बचा जा सकता था। पुलिस की इस नज़रअंदाज़ी ने हमारे दर्द को दोगुना कर दिया”। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में “कट्टर नियंत्रण” और “सख्त कार्रवाई” की माँग की, जिससे भविष्य में ऐसे भयावह अपराधों को रोका जा सके।

ओडिशा पुलिस ने इस मांग पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, परन्तु स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि मामला जांच के तहत है और यदि कोई चूक सिद्ध हुई तो उचित कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस की ‘मेनस्ट्रीम’ लापरवाही को उजागर कर, नियमों के कड़ाई से पालन की वकालत की है।

यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था में मौजूदा कमजोरियों की ओर भी इशारा करती है। जब पुलिस का अपना कर्तव्य भी पूरा नहीं हो पाता, तो नागरिकों का भरोसा क्षीण हो जाता है, और समाज में अनियंत्रित उबाल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

Published: May 8, 2026