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ओडिया समूहों ने ISKCON के स्नान यात्रा व रथ यात्रा के पूर्वकालिक आयोजन पर उठाया प्रश्न

कुतुब्बर (उपरोक्त शहर) – इस साल ISKCON मंदिर ने पारम्परिक रथ यात्रा और स्नान यात्रा के समारोहों को नवम्बर में आयोजित करने की योजना जारी की, जो सामान्य रूप से दीवाली के बाद के शरद महीने में शुरू होते हैं। इस कदम पर ओडिया-समुदाय के प्रतिनिधियों ने दृढ़ विरोध जताया, यह दावा करते हुए कि इस परिवर्तन से न केवल धार्मिक रीति-रिवाज़ों में बाधा उत्पन्न होगी, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पूर्व नियोजित सामुदायिक सुविधाओं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

समुदाय के प्रमुख, श्री अभिजीत पटनायक, ने कहा कि ओडिया पंजारियों की शरदकालीन यात्रा पर पारम्परिक तिथियों का पालन करना सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिये आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की तिथि‑परिवर्तन से स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंध, ट्रैफ़िक नियंत्रण तथा सार्वजनिक स्थानों की पुनः व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे वर्तमान में कुप्रबंधित सड़कों और पार्कों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

नगर निगम के सचिव, सुश्री मीरा शेट्टी ने बताया कि ISKCON के अनुरोध पर उन्होंने उपचारात्मक सुरक्षा योजना तैयार कर ली है, जिसमें पुलिस की अतिरिक्त तैनाती, रोग नियंत्रण उपाय और जन-सम्पर्क टीम का गठन शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष के जलवायु परिवर्तन और मौसमी बारिश के कारण सार्वजनिक स्थल पर भीड़भाड़ के जोखिम बढ़ सकते हैं, इसलिए किसी भी परिवर्तन से पहले विस्तृत जोखिम‑आकलन आवश्यक होगा।

पुलिस प्रमुख इंटेलेक्टुअल रॉबर्ट कॉलिन्स, जो ब्रिटेन में स्थानीय ओडिया समूहों से जुड़े रहे हैं, ने कहा कि वह समुदाय के दृष्टिकोण को समझते हैं और प्रशासन के साथ मिलकर एक संतुलित समाधान खोजने के लिये तैयार हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदायों की प्रतिक्रिया को देखते हुए, सार्वजनिक आयोजन में पारदर्शिता और संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक स्पष्ट हो गई है।

उपरोक्त विवाद ने नागरिक सुविधा एवं प्रशासनिक क्षमता के प्रश्न को भी उजागर किया। स्थानीय निवासियों ने कहा कि पिछले वर्षों में रथ यात्रा के दौरान सड़क बंदी, आवाज़ में वृद्धि और कचरे की सफाई में देरी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई थीं। इस बार यदि कार्यक्रम को पहले शुरू किया गया तो इन समस्याओं का समाधान पहले से योजना में शामिल करना आवश्यक होगा।

अधिकारियों ने बताया कि वे समय‑सारिणी को पुनः विचार करने के लिये एक सलाहकार समिति बनाएंगे, जिसमें धर्मसम्प्रदायों, समुदाय प्रतिनिधियों और शहरी नियोजन विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में ओडिया समूहों की शंकाओं को गंभीरता से लिया जाएगा, और आवश्यकतानुसार तिथि‑परिवर्तन को रोकने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।

जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, ISKCON ने कहा है कि वे मौजूदा योजना के अनुसार सभी सुरक्षा एवं सुव्यवस्था उपायों को लागू करेंगे, साथ ही समुदाय के साथ संवाद जारी रखेंगे। इस प्रकार, धार्मिक उत्सव, शहरी प्रशासन और सामाजिक संवेदनशीलता का संतुलन बनाने हेतु एक जटिल परस्पर संवाद जारी है।

Published: May 4, 2026