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एसीबी ने पूर्व मंत्री जोशी को JJM टेंडर मामले में गिरफ्तार किया
राज्य के एंटी-कॉरप्शन ब्यूरो (ACB) ने देर रात 7 बजकर 15 मिनट पर पूर्व मंत्री श्री जोशी को JJM टेंडर घोटाले में शामिल होने के संदेह में हिरासत में ले लिया। दर्ज किए गए रिवॉल्वर में यह मामला पिछले दो वर्षों में कई सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, "जवाबदेही जाँच मॉड्यूल" (JJM) टेंडर, से जुड़ा है।
जांच के अनुसार, जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में मूल्यांकन मानकों को बदलवाकर निजी बनधन कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाया। इस कंपनी को अनुबंध के लिए अनुचित रूप से बढ़ी हुई राशि मिल गई, जबकि कार्य गुणवत्ता में कमी और समय सीमाओं का उल्लंघन देखा गया। ACB ने यह भी बताया कि कई वित्तीय लेन‑देनों का ट्रेस टेंडर के सुनियोजित दस्तावेज़ीकरण से मेल नहीं खाता।
पुलिस ने टेंडर के प्रॉक्सी दस्तावेज़, बैंक स्टेटमेंट, और संदेहित लाभार्थी के विज्ञापन‑बिलेट को बरामद किया। इस दौरान, जोशी ने यह दावा किया कि वह इस प्रक्रिया से अनभिज्ञ था और सभी औपचारिकताओं को अपने सलाहकारों पर सौंप दिया। यह बयान न्यायालय में पेश की गई सामग्री के साथ किन्ही भी रूप में मेल नहीं खाता, जैसा कि ACB ने उजागर किया।
राज्य सरकार ने इस विकास कार्य में विशेष रूप से सार्वजनिक‑खरीद व्यवस्था को सुदृढ़ करने की घोषणा की थी, परंतु इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हुई। नागरिक समूहों ने कहा कि इन घोटालों ने सार्वजनिक धारणा में भरोसे की खाई को गहरा कर दिया है, जिससे आगामी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बजट के उचित उपयोग पर प्रश्न उठ रहे हैं।
अगले हफ्ते में न्यायिक सुनवाई निर्धारित है, जिसमें जोशी के लिए प्रस्तावित जेल की सजा और संभावित जुर्माना पर चर्चा होगी। साथ ही, ACB ने सभी संबंधित सामाजिक अनुबंधों की विस्तृत ऑडिट का आदेश दिया है, ताकि इस प्रकार की नीतिगत त्रुटियों को भविष्य में रोका जा सके। यह मामला स्थानीय प्रशासन को एक चेतावनी देता है: सार्वजनिक निधियों के प्रबंधन में निष्ठा और पारदर्शिता अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है।
Published: May 8, 2026