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एमसीजी के सफ़ाई कर्मचारियों ने हड़ताल बढ़ाई, 11 मई तक कचरा संग्रह पर रोक
मुंबई के मेट्रोपॉलिटन सिटी गैवर्नमेंट (एमसीजी) के सफ़ाई कर्मियों ने अपना स्ट्राइक 11 मई तक बढ़ा दिया, जिससे शहर भर में कचरा संग्रह की सेवाएँ पूरी तरह रुक गईं। स्थानीय यूनियन ने आज बताया कि उसने आउटसोर्स्ड स्टाफ़ के काम को अटकाने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है और अब वह किसी भी निजी ठेकेदार को कार्य‑स्थल पर प्रवेश से रोक रही है।
पिछले हफ्ते शुरू हुई मूल हड़ताल के बाद, कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, समय‑सारिणी में सुधार और निरन्तर रोजगार की मांग की थी। नगर निगम ने कर्मचारियों की माँगों को नज़रअन्दाज़ कर करार पर निजी ठेकेदारों को कचरा संग्रह का कार्य सौंपा था, जिससे श्रमिक वर्ग में असंतोष का माहौल बन गया।
उसी दिन नगरपालिका ने पुलिस को बाधाओं को हटाने के आदेश दिए और एशोरेंस बोर्ड को अल्पकालिक वैकल्पिक उपाय तैयार करने के लिये निर्देशित किया। पुलिस ने कुछ क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जाम्पर को व्यवस्थित करने के प्रयास किए, परंतु यूनियन की टीमों ने इन प्रयासों को निरंतर रोक दिया। प्रशासनिक अधिकारी अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ‘अस्थायी कचरा निकासी योजना’ को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, परन्तु यह योजना अभी तक ठोस नहीं दिखती।
परिणामस्वरूप, कई प्रमुख सड़कों पर कचरा ढेर जमा हो गया है; बच्चों के स्कूलों के प्रांगण में कूड़े की दुर्गंध ने अभिभावकों को असहज कर दिया है, जबकि स्थानीय व्यवसायियों को ग्राहकों की अनुपस्थिति का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने जलवायु‑संबंधी रोगों के बढ़ते जोखिम को लेकर चेतावनी जारी की है, और निवासियों को अनुच्छिन्न कचरा प्रबंधन के चलते अस्थायी रूप से अपने घरों में ही कूड़ा निपटाने का निर्देश दिया गया है।
जैसे ही शहर के हरे‑भरे बागों की छटा अब कूड़ादानों की भीड़ से टकरा रही है, यह स्पष्ट हो रहा है कि प्रशासनिक अति‑निर्भरता और अनुचित आउटसोर्सिंग नीतियां सार्वजनिक सेवा के मूल उद्देश्य से दूर हो गई हैं। स्थायी समाधान के अभाव में, मौजूदा व्यवस्था केवल अस्थायी राहत प्रदान कर रही है, जबकि समान्य नागरिक को जो दैनिक असुविधा झेलनी पड़ रही है, वह किसी भी औपचारिक बयान से अधिक स्पष्ट है।
Published: May 8, 2026