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Category: शहर

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एमएसयु ने बीकॉम प्रवेश के लिए नया एंट्रेंस टेस्ट लागू किया, शहर के शिक्षा प्रशासन पर सवाल उठे

महाराष्ट्र राज्य विश्वविद्यालय (एमएसयु) ने इस वर्ष से अपने बैचलर ऑफ़ कॉमर्स (बीकॉम) कार्यक्रम में प्रवेश के लिए एक विशेष एंट्रेंस टेस्ट लागू कर दिया है। यह कदम विश्वविद्यालय के कार्यकारी समिति द्वारा ‘अधिकतम योग्यता, न्यूनतम शुल्क’ के नारे के तहत उठाया गया, जबकि शहर के कई कॉलेज प्राथमिक रूप से स्वयंसेवी आधार पर इस कोर्स को प्रदान कर रहे हैं।

उदित परीक्षण का दायरा दो चरणों में बाँटा गया है: प्रथम चरण में सामान्य योग्यता परीक्षा और द्वितीय चरण में विशिष्ट कौशल परीक्षण। विश्वविद्यालय के प्राचार्य ने कहा, “स्नातक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कठोर चयन प्रक्रिया आवश्यक है, जिससे हमारे बीकॉम ग्रेजुएट्स की बाजार योग्यता में सुधार होगा।”

परिणामस्वरूप, शहर के कई मौजूदा एवं संभावित छात्रों को अब अतिरिक्त अध्ययन लागत और तैयारी की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। विशेषकर उन विद्यार्थियों के लिए, जो माध्यमिक शिक्षा के बाद आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं, यह नया टेस्ट एक अनावश्यक बाधा बनकर उभरा है।

शहर के शिक्षा विभाग ने इस बदलाव पर त्वरित टिप्पणी नहीं की, परन्तु सार्वजनिक सूचना आयोग ने विश्वविद्यालय को 15 दिनों के भीतर विस्तृत कारणों को प्रकाश में लाने का आदेश दिया है। विभागीय अधिकारी इस बात से अनिच्छुक हुए कि क्या यह नया परीक्षण छात्रों के लिए वास्तविक मूल्य वर्धन करेगा या केवल प्रवेश प्रक्रिया को जटिल बनाकर अनुपयुक्त बाधाएँ उत्पन्न करेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम की नाजुकता को उजागर किया। उन्होंने कहा, “अगर विश्वविद्यालय अपने प्रवेश मानकों को स्पष्ट नहीं करता, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य को धूमिल करेगा, बल्कि स्थानीय शैक्षणिक इकोसिस्टम में असमानता भी बढ़ाएगा।”

आलोचकों ने यह भी संकेत दिया कि विश्वविद्यालय ने इस निर्णय से पूर्व स्थानीय कॉलेजों और छात्र समाजों के साथ पर्याप्त परामर्श नहीं किया। “एक नगर में जहाँ कई सरकारी और अर्धसरकारी कॉलेज हैं, वहीँ एक ही संस्थान द्वारा ऐसा कदम उठाना, बिना सामुदायिक सहभागिता के, शैक्षणिक नीति हेतु गहरी रक्तस्राव की निशानी है,” एक वरिष्ठ व्याख्याता ने टिप्पणी की।

नागरिकों और छात्रों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ अभ्यार्थी उच्च मानक की आशा में इस परिवर्तन का स्वागत करते हैं, जबकि कई लोग इसे अनावश्यक ‘देहात में प्रवेश परीक्षा’ के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर उठे बहस में अक्सर यह कहा जाता है कि “शिक्षा को कवायद नहीं, अवसर बनना चाहिए”।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि एमएसयु किस हद तक इस प्रतिक्रिया को समझते हुए परीक्षा ढाँचे में लचीलापन लाता है, और क्या नगरपालिका शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया को सार्वजनिक हित के साथ समन्वित कर सकता है। तब तक, शहर के बीकॉम aspirants को नई परीक्षा के लिये तैयारियों में समय और संसाधन दोनों खर्च करने को मजबूर किया जा रहा है—एक ऐसा कार्य जो प्रशासनिक निर्णयों की ‘सफलता’ को मापते समय अक्सर अनदेखा रह जाता है।

Published: May 6, 2026