एनसीएलएटी ने वेदांता की याचिकाओं को खारिज कर अदादी समूह को जल परियोजना का ठेकेदार बनाते रहने की मंजूरी दी
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायालय (एनसीएलएटी) ने 4 मई को वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस निर्णय के बाद, अदानी समूह को "जाल" (जल अभियांत्रिकी परियोजना) के ठेकेदार के रूप में चयनित रहने की अनुमति मिली।
वेदांता ने माना था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, हितधारकों के बीच असमानता तथा संभावित आर्थिक नुकसान के कारण अदानी को प्राथमिकता देना अनुचित है। अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार कर कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में सभी नियामक प्रावधानों का पालन किया गया था और कोई स्पष्ट नियम‑भंग नहीं पाया गया।
इस निर्णय के कई आयाम हैं। प्रथम, सरकार‑निगरानी वाली जल परियोजनाओं में निजी कंपनियों का बड़ा हिस्सा बनने से सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल की तीव्रता बढ़ेगी। दूसरे, अदानी समूह की सुदृढ़ वित्तीय स्थिति और विस्तारित बुनियादी ढांचा संविदान को देखते हुए, प्रशासनिक लागत में संभावित कमी का दावा किया गया है। परन्तु, नागरिकों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि एक ही समूह के हाथों में बड़े जल प्रोजेक्ट का केंद्रीकरण सेवा की गुणवत्ता, मूल्य निर्धारण और उत्तरदायित्व में कमी ला सकता है।
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बड़े शहरों में जल आपूर्ति के सुधार की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन पिछले पाँच साल में कई जल‑परियोजनाओं के विलंब और लागत‑वृद्धि ने जनता का भरोसा कम कर दिया है। "जैसे सर्दियों में गरमा‑गरम चाय की मांग बढ़ती है, वैसे ही जल परियोजनाओं में भी पारदर्शिता की कमी का मौसम चल रहा है," एक स्थानीय प्रशासनिक विश्लेषक ने सूखे व्यंग्य से टिप्पणी की।
आगे की कार्रवाई में, नगरपालिका परिषदें इस निर्णय की समीक्षा कर रही हैं और जल मूल्य निर्धारण एवं उपयोगकर्ता अधिकारों को लेकर नियामक दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार कर रही हैं। यदि नागरिक समूहों को लगता है कि अदानी समूह के चयन से सेवाओं की लागत में असमान रूप से वृद्धि होगी, तो सार्वजनिक सुनवाई या उपभोक्ता फोरम में नया संघर्ष जारी रह सकता है।
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल वर्तमान कानूनी ढाँचे के भीतर है और भविष्य में यदि कोई नई सूचना या प्रक्रिया‑गलती सामने आती है, तो पुनः परीक्षण की संभावना बनी रहेगी। इस बीच, शहर के निवासियों को यह भी इंतजार करना पड़ेगा कि आगे की कार्यान्वयन गति, जल की गुणवत्ता और मूल्य के वास्तविक प्रभाव को देखते हुए क्या सुधार संभव होता है।
Published: May 5, 2026