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Category: शहर

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एक दिवसीय साफ‑सफाई के बाद भी प्राचीन किले‑शहर में कूड़े के ढेरों से नागरिक जूझ रहे हैं

बजट‑समीक्षा के दौरान नगर निगम ने एक माह से अधिक समय पहले ‘एक दिन में किले‑शहर को चमकाने’ का मार्बल‑वॉल शाह कारवां करके, शहर के प्राचीन गलियों और बाजारों को अल्पकालिक रूप से चमका दिया। तमाम मीडिया कैमरों ने इस पर ‘नगद साफ़‑सफाई’ की घोषणा को सहेजते हुए कवरेज किया, पर असलियत में मामला कहीं अधिक गहरा है।

परिचालन के आंकड़ों के अनुसार, इस बंद‑शहर में लगभग 12,000 घर रोज़ाना औसतन 1.5 किलोग्राम कचरा उत्पन्न करते हैं। जबकि नगरपालिका द्वारा स्थापित 150 जमा‑बिंदु और 30 कचरा‑ट्रक केवल सप्ताह में दो बार ही चालू किए जाते हैं, जिसके कारण कूड़ा सड़कों, घरोँ के सामने और छोटे गली‑घर में लगातार इकट्ठा हो रहा है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से कूड़ा धीर‑धीर जमा होता गया है। “पहले तो हम सिर्फ़ एक‑दूसरे के सामने रखे थैले हटाते थे, पर अब तो कूड़े की रेत पास में मौजूद हर एक गली में पहाड़ जैसी दिख रही है,” एक गृहस्थ ने कहा, जो खुद को ‘पर्यावरण‑संरक्षक’ कहने से नहीं हिचकिचाते।

नागरिक प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि केवल एक दिन की चमक‑भरी सफ़ाई को ‘स्थायी समाधान’ का दावेदार बनाना प्रशासनिक धुंधली है। उन्होंने नगर निगम को साप्ताहिक रूट‑मैप, अधिक कचरा‑ट्रक और सही समय‑पर निकासी की माँग की। उत्तर में, नगरपालिका अधिकारी ने कहा कि “एक‑दिन‑की सफ़ाई ने जनजागरूकता बढ़ाई है और अब हम नई ‘दैनिक संग्रह प्रणाली’ शुरू करने की प्रक्रिया में हैं,” पर ठोस तिथियों का उल्लेख नहीं किया।

पड़ोस के कुछ छोटे व्यापारियों ने कहा कि निरंतर कचरा जमा होने से निचली दुकानें और खाद्य स्टाल बंद हो रहे हैं, जिससे आर्थिक नुक़सान भी बढ़ रहा है। “रोज़मर्रा की आय तो बस कूड़े के डर से घटती जा रही है,” एक विक्रेता ने बताया, जो इस बात पर इशारा करता है कि बुनियादी ढाँचे की विफलता सीधे स्थानीय अर्थव्यवस्था को हानि पहुँचा रही है।

शहर की पुलिस विभाग ने भी मामला संभालने की कोशिश की, पर उनका दायरा केवल ‘कुचले‑कुचले कूड़े को हटाने के लिए गंदे क्षेत्रों में प्रवेश रोकना’ तक सीमित रहा। कई बार पुलिस को कूड़े‑भरे गली‑घर में फुटपाथ से गड़बड़ी के कारण यातायात जाम की शिकायतें मिलीं, पर उन्होंने इसको ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य’ के निचले स्तर पर ही रखा।

पिछले दो महीनों में इस शहर ने “सम्पूर्ण स्वच्छता” के नाम पर कई विकास‑घोषणाएँ सुनाई हैं, पर वास्तविकता में कूड़े‑के‑ढेरों की बढ़ती लकीरें इन वादों को बेपरवाह करती दिखती हैं। शहर का वास्तु‑शिल्प मूल्य और जटिल प्राचीन गलियों की संरचना शायद प्रशासन को अक्सर “तत्परता” के बजाय “स्थायित्व” पर काम करने की चुनौती देती है।

आगे की राह स्पष्ट लगती है: साप्ताहिक और दैनिक संग्रह का ठोस शेड्यूल, पर्याप्त कचरा‑डिब्बों का वितरण, नागरिकों को विभाजन‑प्रणाली की जानकारी, तथा इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्वतंत्र ऑडिट इकाई। तभी ‘एक‑दिवसीय चमक‑भरी सफ़ाई’ को वास्तविक ‘सतत स्वच्छता’ में बदला जा सकेगा।

Published: May 9, 2026