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उदयपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण त्रुटि से किशोरी की मौत, डॉक्टर की कमी से नर्सों ने धरा हड़ताल

राजस्थान के उद्यनपुर जिले के कोटड़ा ब्लॉक में स्थित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में दो हफ्ते पहले एक किशोरी का अनजाने में दिया गया इंजेक्शन उसकी मृत्यु का कारण बना। इस दुर्घटना की रिपोर्ट मिलते ही नर्सों का हड़ताल का स्वरुप सामने आया, जिसमें उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल की पूर्ति और एक सहकर्मी द्वारा भुगतान किए गए कथित वसूली के धन की वापसी की मांग की है।

मृतक 16 वर्षीय छात्रा को स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने छोटेpox‑आउटब्रीक के तहत टीकाकरण के लिए बुलाया था। डॉक्टर की अनुपस्थिति में कार्यभार नर्स पर भीड़ाजैसा गिर गया, और वह ही इंजेक्शन संचालित करने वाले प्रमुख बन गई। पश्चात जांच से पता चला कि प्रयुक्त वैक्सीन का प्रकार या खुराक में त्रुटि हुई थी, जिससे नाबालिग की शारीरिक प्रतिक्रिया असह्य रही और अंततः मृत्यु हुई।

घटना स्थल पर उपस्थित डॉक्टर अब तक नहीं मिल पाए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग ने बेक़ायदा डॉक्टर को कैसे हटाया या अनुपलब्ध रखा। नर्सों ने बताया कि इस ब्लॉक में योग्य चिकित्सकों की chronic कमी है, जिससे नर्सें अक्सर अकेले निर्णय लेती आ रही हैं। “डॉक्टर की कुर्सी खाली है, लेकिन जिम्मेदारी की बाड़ नहीं,” नर्स प्रतिनिधि ने हड़ताल घोषणा में कहा, जो प्रशासनिक विफलता पर सूखे व्यंग्य को दर्शाता है।

नर्स यूनियन ने स्वास्थ्य प्रशासन से तत्काल सुरक्षा आश्वासन मांगा है, जिसमें नर्सों को उचित चिकित्सीय निगरानी, नियमित प्रशिक्षण और आपातकालीन इनिशिएटिव्स की उपलब्धता शामिल है। इसके अतिरिक्त, कुछ नर्सों ने यह भी उजागर किया कि एक सहकर्मी ने पिछले महीने विस्तारित वसूली के तहत कुछ तहत 1.5 लाख रुपये अपने वरिष्ठ को भुगतान कराए थे, और अब उसे वापस करने की माँग की जा रही है। यह आर्थिक दबाव भी स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल को कम कर रहा है।

स्थानीय प्रशासन ने एक विशेष जांच समिति का गठन कर घोषणा की है और कहा है कि गलत दवा पहचान और डॉक्टर की अनुपस्थिति दोनों पर स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी। हालांकि, पहले से ही ज्ञात है कि कोटड़ा ब्लॉक में 2024‑2025 वित्तीय वर्ष में केवल 37 डॉक्टरों की नियुक्ति हुई, जबकि 150 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं को पूर्ण चिकित्सकीय कवर प्रदान करना आवश्यक है।

किशोरी के परिवार ने न्याय की अपील की है और मांगी है कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर जड़ता से कह रहे हैं कि “जैसे ही डॉक्टर की कुर्सी खाली, जवाबदेही का प्रेशर भी कम हो जाता है।” इस सन्देश में वे मौजूदा स्वास्थ्य‑सेवा ढाँचे की गहरी कमजोरियों को रेखांकित कर रहे हैं।

हड़ताल के चलते कोटड़ा ब्लॉक के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी जांच और टीकाकरण कार्य रुक गए हैं, जिससे स्थानीय जनसंख्या को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, यह देखना बाकी है; परन्तु वास्तविक सुधार तभी संभव है जब डॉक्टरों की कमी को सख़्ती से हल किया जाए और नर्सों को सुरक्षित कार्य परिवेश प्रदान किया जाए।

Published: May 4, 2026