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उदयपुर पीएचसी में इंजेक्शन से किशोर की मौत, डॉक्टर गुम, नर्स पर प्रश्नवाचक

उदयपुर नगर स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में 16 वर्षीय किशोर को एंटी‑बायोटिक इंजेक्शन देने के बाद 24 घंटे में ही वह गिर गया और मृत घोषित किया गया। मेडिकल रिकॉर्ड में यह दर्ज है कि रोगी को दर्द एवं बुखार की शिकायत के कारण स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा उपचार दिया गया, परंतु उपचार के बाद मृत्यादायक प्रतिक्रिया का कोई स्पष्ट कारण अभी तक नहीं बताया गया।

घटना के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए युवा रोगी की मृत्यु के संभावित कारणों की जाँच शुरू कर दी। प्रारम्भिक जाँच में यह उजागर हुआ कि उस दिन पीएचसी में उपस्थित चिकित्सक अभिलेख के अनुसार प्रस्थान कर चुके थे और बाद में उनका पता नहीं चल पाया, जिससे प्रयोगशाला रिपोर्ट में नामित डॉक्टर की अनुपस्थिति सिद्ध हुई।

नर्स को भी सवालों के घेरे में ला दिया गया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि नर्स को दवा की सही डोज़, साफ़ सुई और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का कठोर पालन करना अनिवार्य है। नर्स ने इस आरोप का विरोध किया है, यह दावा किया कि वह निर्देशानुसार कार्य कर रही थी और डोज़ निर्धारित करने की जिम्मेदारी डॉक्टर की थी।

उदयपुर नगरपालिका ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अंतरिम निरीक्षण आदेश जारी किया। नगर स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि पीएचसी की बुनियादी सुविधाओं, स्टाफिंग मानकों और दवाओं की सुरक्षित भंडार व्यवस्था की व्यापक ऑडिट रिपोर्ट दो हफ्तों के भीतर तैयार की जाएगी। इस बीच, पीड़ित परिवार ने नुकसान की भरपाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की माँग की है।

रुजु होते हुए, यह घटना छोटे शहरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दो दशा को उजागर करती है: एक ओर बुनियादी सुविधाओं का अभाव और दूसरी ओर कर्मचारियों के जवाबदेही पर अस्पष्टता। जहाँ एक ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोगियों का भरोसा स्थापित है, वहीं नियामक निगरानी में चूक अक्सर ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण परिणामों को जन्म देती है। विशेषज्ञों ने कहा कि डॉक्टर की अनुपस्थिति के दौरान नर्स को एकाधिक निर्णय लेना न केवल कार्यभार बढ़ाता है, बल्कि त्रुटि की संभावना को भी कई गुना बढ़ाता है।

भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, स्टाफिंग मानकों को कठोर बनाने और किसी भी चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद अनिवार्य द्विपक्षीय जाँच को लागू करने का आश्वासित किया है। फिलहाल, जांच रिपोर्ट के इंतज़ार में पीड़ित परिवार निराशा और गहरी शोकध्वनि के साथ न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

Published: May 4, 2026