उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर की प्रीपेड प्रणाली को समाप्त, सभी ग्राहक पोस्टपेड़ बिलिंग पर
राष्ट्रीय राजधानी के बाद उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों में राज्य सरकार ने औपचारिक तौर पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रणाली को बंद कर, सभी उपयोगकर्ताओं को पोस्टपेड़ (क्रेडिट) बिलिंग मॉडल में बदल दिया है। यह निर्णय 5 मई, 2026 को प्रकाशित एक आधिकारिक आदेश के तहत लागू किया गया, जिसमें बिजली विभाग को निर्देश दिया गया कि अगले दो महीनों के भीतर सभी प्रीपेड ग्राहक को पोस्टपेड़ खाते में परिवर्तन करना होगा।
प्रीपेड मॉडल का परिचय 2019 में कई शहरों में किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शी ऊर्जा उपभोग एवं राजस्व सुरक्षा सुनिश्चित करना था। हालांकि, लागू करने के पहले चार वर्षों में कई तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आईं। उपयोगकर्ताओं को रिचार्ज के लिए लगातार मोबाइल एप्लिकेशन या एजेंट नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे विलंब और असुविधा बढ़ी। वहीं, ऊर्जा विभाग ने बताया कि प्रीपेड खाते में गड़बड़ी के कारण राजस्व में 2.5% की गिरावट हुई, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत में अनुमानित घाटा बढ़ा।
नए पोस्टपेड़ बिलिंग मॉडल में ग्राहक मापी गई इकाइयों के आधार पर हर महीने का बिल प्राप्त करेंगे, जिसे बैंक, डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान किया जा सकेगा। विभाग का कहना है कि यह प्रणाली न केवल भुगतान की समयबद्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को उपभोग पर अधिक नियंत्रण भी देगी। साथ ही, पोस्टपेड़ बिलिंग के साथ नई ऊर्जा-कुशल छूट और सब्सिडी योजनाओं को भी जोड़ा जाएगा, जिससे गरीब वर्ग को अतिरिक्त राहत मिलने की आशा जताई गई है।
परिवर्तन के कारण नागरिकों को तत्काल कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले से प्रीपेड खाते में जमा राशि वाले उपयोगकर्ताओं को राशि का ट्रांसफर या वापसी प्रक्रिया में अस्थायी भ्रम और देरी की शिकायतें मिली हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी के कारण ऑनलाइन बिल भुगतान कठिन हो रहा है, जिससे स्थानीय एजेंटों पर अतिरिक्त दबाव बना है। उपभोक्ताओं के बीच यह आशंका भी उठी है कि पोस्टपेड़ बिलिंग में अचानक बढ़ते बिलों के कारण आर्थिक बोझ बढ़ सकता है, विशेषकर उन घरों में जहाँ बिजली की खपत अनिवार्य रूप से अधिक है।
प्रशासनिक पक्ष से बात करें तो, उत्तर प्रदेश बिजली वितरण कंपनी (UPEDC) ने कहा कि परिवर्तन के दौरान सभी ग्राहकों को सहायता प्रदान करने के लिए एक हेल्पडेस्क स्थापित किया जाएगा और रिचार्ज बकाया राशि का स्वतःरूप से पोस्टपेड़ खाते में समायोजन किया जाएगा। साथ ही, 30 दिनों की माफी अवधि में किसी भी भुगतान त्रुटि पर दंड नहीं लगाए जाएंगे, जिससे संक्रमण सुगम हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीपेड से पोस्टपेड़ में बदलाव एक रणनीतिक कदम है, पर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नयी प्रणाली की पारदर्शिता और ग्राहक सहायता प्रोटोकॉल कितनी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं। यदि अनपेक्षित बिल वृद्धि या भुगतान प्रक्रिया में बाधाएँ बनी रहती हैं, तो यह कदम सार्वजनिक भरोसे को कमजोर कर सकता है। वर्तमान में, मौजूदा परिवर्तन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी जा रही हैं—कुछ नागरिक अधिक लचीले बिलिंग विकल्पों की सराहना कर रहे हैं, जबकि अन्य सहजता के अभाव को लेकर नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं।
संक्षेप में, उत्तर प्रदेश सरकार का प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रणाली को समाप्त कर पोस्टपेड़ बिलिंग को लागू करना एक महत्वपूर्ण नीति परिवर्तन है, जो राजस्व स्थायित्व और उपभोक्ता सहजता को संतुलित करने का प्रयास दर्शाता है। इसका वास्तविक प्रभाव तब ही स्पष्ट होगा, जब प्रशासनिक उपायों की कार्यान्वयन गति और नागरिकों की अनुकूलन क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
Published: May 5, 2026