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Category: शहर

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उच्च न्यायालय ने मथुरा में भीड़ सुरक्षा को लेकर हाइलाइट किया, आपदा प्रबंधन योजना का विवरण माँगा

मथुरा नगर निगम और जिला प्रशासन को उच्च न्यायालय ने आधिकारिक नोटिस जारी कर बड़े धार्मिक समारोहों में संभावित भीड़‑भाड़ के प्रबंधन हेतु आपदा प्रबंधन योजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह कदम पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय शहरों में घटित भीड़‑संकट की घटनाओं के बाद आया, जहाँ प्राथमिक तैयारी की कमी से कई जीवन रक्तस्तम्भ बन गए।

न्यायालय के आदेश में विशेष रूप से जनसांठी वाले कार्यक्रमों—जैसे जन्माष्टमी महोत्सव—के दौरान लागू किए जाने वाले सुरक्षा उपायों, मेडिकल किट्स, त्वरित निकासी मार्ग, ठहराव बिंदु और पुलिस तथा सुरक्षा कर्मियों की संख्या के आँकड़े माँगे गये हैं। साथ ही, संकट‑प्रबंधन टीम की संरचना, प्रशिक्षण स्तर और संचार प्रणाली की भी जाँच का कहा गया।

मथुरा नगर निगम ने त्वरित उत्तर में कहा कि सभी आवश्यक योजनाएँ तैयार हैं और वे “सभी प्रासंगिक प्रोटोकॉल का पालन” कर रहे हैं, परंतु वे अभी तक विस्तृत दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं कर पाए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने भी यह बतलाया कि “आपदा प्रबंधन समूह” नियमित रूप से अभ्यास करता है, परंतु न्यायालय की माँग पर “विवरण शीघ्र ही प्रस्तुत किए जाएंगे।”

न्यायालय की इस कदम को कई विशेषज्ञों ने साहसिक माना, जबकि प्रशासन को “स्लो‑मोशन” प्रतिक्रिया के रूप में आलोचना की गई। एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी में कहा गया, “जैसे ही क़ानून ने बुनियादी सवाल उठाए, प्रशासन ने ‘कुर्सी‑स्विचिंग’ के साथ उत्तर दिया।” ऐसा लगता है कि अब तक का ‘रिपोर्ट‑बिना‑रिपोर्ट’ काफी हद तक टाल मिटा कर दिया गया है।

स्थानीय नागरिकों ने इस कदम को स्वागत किया, क्योंकि पारदर्शिता के अभाव में उनका विश्वास क्षीण हो चुका था। कई समूह ने कहा कि स्पष्ट योजना न होने पर भीड़‑भाड़ के दौरान “एक सेकंड भी बचाव कार्य के लिये पर्याप्त नहीं होगा।” न्यायालय की इस वैध मांग से उम्मीद है कि भविष्य में संभावित आपदाओं के क्षण में तैयारियों में ठोस सुधार आएगा और नागरिकों को “सुरक्षित अभ्यर्थी” कहा जाए, न कि “अनभिज्ञ शिकार।”

Published: May 6, 2026