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उकलाना में सैनी ने भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में किया सक्रिय प्रचार
हैण्डर प्रदेश के उकलाना विधानसभा क्षेत्र में आज दोपहर से नगर आपके घरों में गूँजते नारे सुनाई दे रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय मध्यम वर्ग के प्रतिनिधि, गीता सैनी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार, धीरज सिंह को समर्थन देते हुए सार्वजनिक मंचों पर अपने भाषण शुरू किए। उनका उद्देश्य, स्वयं को पार्टी के दायरे में प्रमुख जनसम्पर्क कड़ी बनाना बताया गया।
भाजपा ने इस चुनाव में अपने विकास एजेंडा को दोहराते हुए, पानी की आपूर्ति, सड़कों की दुरुस्ती तथा शहरी साखी (पब्लिक) लाइटिंग को प्रमुख वादों के रूप में प्रस्तुत किया है। सैनी के समर्थन ने इन वादों को स्थानीय स्तर पर पुनः पुष्टि की, परन्तु इस बीच नगर प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने के लिए विशेष अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया। कई नागरिकों ने सामाजिक मीडिया पर यह टिप्पणी की कि चुनावी समय में प्रशासनिक संसाधनों का यह प्रयोग, ‘सामान्य नागरिक सेवा’ के दायरे से बाहर है।
उकलाना में आयोजित विभिन्न रैलियों में बसें, ट्रकों और ध्वनि यंत्रों को खुले तौर पर चलाने की अनुमति मिली। यह देखते हुए नगर निगम के कुछ अधिकारी, पुलिस विभाग के साथ मिलकर, शोर प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी के लिए विशेष टीम तैयार कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासकीय निरीक्षण के बावजूद, कई क्षेत्रों में ध्वनि स्तर मानक सीमा को पार कर रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
प्रवर्तन एजेंसियों ने चुनावी क्रम में सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सशस्त्र पोस्टिंगन की व्यवस्था की है। पुलिस ने कहा कि वे सभी सार्वजनिक सभाओं में सुरक्षा का पूर्ण प्रबंध करेंगे, परन्तु नागरिकों से अपील है कि वे प्रत्यक्ष रूप से आवाज़ के उच्च स्तर और ट्रैफ़िक जाम से उत्पन्न होने वाले जोखिमों से बचें।
स्थानीय व्यापारी संगठनों ने कहा कि कई व्यापारिक स्थलों को रैलियों के कारण अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे दिन का आमदनी घट गई। दूसरी ओर, कुछ छोटे उद्यमों को इस बहुत बड़े चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रायोजन एवं प्रचार सामग्री के वितरण से अतिरिक्त राजस्व मिला। इस द्वंद्वात्मक प्रभाव को देखते हुए, आर्थिक लाभ और सामाजिक असुविधा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
सैनी ने कहा, “यह समय है जब हमें एकजुट होकर अपने क्षेत्र के विकास को तेज़ करना चाहिए। भाजपा का मंच केवल वादों की नहीं, बल्कि ठोस कार्यों की भी पासपोर्ट है।” फिर भी यह कहना आसान है, जब सार्वजनिक संसाधन चुनावी बैनर के नीचे कई बार नहीं, बल्कि कई बार दोहराए जाते हैं। यदि इस रैली-धर्मी माहौल में शहरी सुविधाओं की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित रहेगी, तो प्रशासन को ‘विकास’ के नाम पर ‘अस्थिरता’ को कैसे नियंत्रित किया जाए, यही वास्तविक प्रश्न बनता है।
Published: May 8, 2026