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Category: शहर

ईस्ट शंकर नगर में अवैध पुलों से प्राकृतिक नाला बना बदबूदार जलधारा

ईस्ट शंकर नगर के पूर्वी हिस्से में अनधिकृत रूप से निर्मित कई पुलों ने एक प्राकृतिक नाला को पूरी तरह से बंद कर दिया है। जल प्रवाह रुकने के कारण नाले का पानी धुंधला, बदबूदार और कंक्रीट के नीचे जमा हो गया, जिससे स्थानीय निवासियों को साफ‑सफाई और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नगर पालिका के विकास विभाग ने पहले इस स्थान को ‘आधुनिक बुनियादी ढांचा’ के रूप में प्रदर्शित करने का प्रयास किया, किन्तु अंतरिम निरीक्षण नहीं होने के कारण अस्थायी निर्माण को स्थायी रूप में बदल दिया गया। इस प्रक्रिया में उचित पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, सार्वजनिक परामर्श या कानूनी अनुमति जैसी बुनियादी प्रक्रियाएँ पूरी नहीं हुईं। परिणामस्वरूप जल निकासी का मार्ग बाधित होकर नाली के तल में सड़न‑प्रेरित गंध का स्रोत बन गया।

स्थानीय प्रशासन ने प्रारम्भिक शिकायतों पर केवल शब्दों में आश्वासन दिया, जबकि ठोस कार्रवाई में धीमा रहा। पुलिस विभाग ने भी इस मुद्दे को ‘सिविल मामला’ कह कर तेज़ी से हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे अवैध निर्माण के निर्माताओं को बिना दण्ड के कार्य जारी रखने का अवसर मिला।

निवासियों के अनुसार, सुबह‑शाम के समय नाले के पास से गुजरते समय तेज़ गंध के कारण श्वास‑प्रश्वास में कठिनाइयाँ एवं त्वचा पर जलन जैसी लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कुछ घरों में जल स्तर के नीचे जमा हुए कचरे के कारण कीट और मैंग्रोव मछलियों का प्रकोप भी दर्ज किया गया है। इस प्रकार, एक बार स्वाभाविक जलधारा के रूप में कार्य करने वाला नाला अब स्वास्थ्य‑सुरक्षा का जोखिम बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुरंत पुलों को हटाया न गया तो नाले का जल स्तर और अधिक स्थिर हो कर शहरी जल‑निसेचन प्रणाली को प्रभावित करेगा। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए बाढ़‑नियंत्रण के अभाव में भविष्य में व्यापक बाढ़‑प्रभाव से निपटना मुश्किल हो सकता है।

इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र, कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासनिक अभिकर्ताओं को लिखित नोटिस जारी किया है, जिसमें अवैध संरचनाओं को हटाने, नियमित रख‑रखाव एवं जल पुनर्स्थापन के लिए त्वरित कार्यवाही की मांग की गई है। नगर निगम को अब इस ‘बनावट‑के‑बल’ के उल्लंघन को रोकते हुए, फिर से पर्यावरणीय नियोजन के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य हो गया है।

Published: May 6, 2026