इरानी पिस्ता की कमी से पुणे में कीमतें 50 % बढ़ीं, नगर प्रशासन पर सवाल
पुणे में बाजारों में इरानी पिस्ता की उपलब्धता में अचानक गिरावट आई है, जिससे आजकल की कीमतें पिछले महीने की तुलना में लगभग पचास प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। यह उछाल मुख्यतः ईरान में निर्यात प्रतिबंध, शिपिंग देरी और कस्टम प्रक्रिया में बढ़ती बाधाओं के कारण हुआ है।
नगर निगम (पीएमसी) ने अब तक इस कीमत में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफ़डिए) ने मौजूदा आपूर्ति‑संतुलन का सर्वेक्षण करने का आश्वासन दिया, परंतु विस्तृत रिपोर्ट अभी तक जनता के सामने नहीं आई। इसके विपरीत, कई थोक बाजारों में मध्यस्थों ने कीमतें दो गुना कर देने की सूचना दी, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन रहा है।
स्थानीय खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि उन्होंने पिछले दो हफ्तों में आय में 30 % से अधिक की गिरावट देखी है, जबकि ग्राहकों ने महंगी कीमतों के कारण पिस्ता की खरीद को पूरी तरह से छोड़ना शुरू कर दिया है। इस दबाव को देखते हुए कुछ बड़े सुपरमार्केट ने वैकल्पिक स्रोतों, जैसे अमेरिकी और तुर्की पिस्ता, का आयात करने की घोषणा की है, परंतु लागत में अंतर को लेकर अंततः कीमतें वही स्तर पर बनी रहेंगी।
पुणे महानगरपालिका की ओर से अब तक कोई ठोस उपाय सामने नहीं आया है। कुछ अधिकारियों का सुझाव है कि बाजार निगरानी को सुदृढ़ करके अस्थायी मूल्य सीमा निर्धारित की जाए, परन्तु इस योजना के कार्यान्वयन की तारीख अभी अनिश्चित है। आलोचकों का तर्क है कि अत्यधिक नियामक हिचकिचाहट और पूर्व नियोजन की कमी ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है, जबकि नागरिकों को कीमतों के झटके में जीवनयापन करने को मजबूर किया गया है।
सारांश में, इरानी पिस्ता की आपूर्ति बाधित होने से पुणे में उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि प्रशासनिक प्रतिक्रिया में गति और स्पष्टता की कमी स्पष्ट है। आगामी दिनों में यदि ठोस मूल्य नियंत्रण या वैकल्पिक आयात निटाए गए तो इस संकट का असर दैनिक जरूरतों तक फैल सकता है।
Published: May 4, 2026