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इंदौर में मोसकिटो‑जनित रोगों की चेतावनी: स्वास्थ्य विभाग ने सतत निगरानी व नियंत्रण की अपील
इंदौर महानगर में लगातार बदलते मौसम और जलजमाव की समस्या ने स्वास्थ्य अधिकारियों को मच्छर‑जनित रोगों के बढ़ते खतरे से चिंता में डाल दिया है। नगर पालिका के कई जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थिर पानी की भरमार, अनियमित बारिश की बौछार और अपूर्ण नालियों ने मच्छर के विकास के लिये अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण किया है।
इंदौर स्वास्थ्य विभाग ने आज एक विस्तृत ब्रीफिंग में कहा कि छिद्रित नालियों, निर्माण स्थलों और खुले जलाशयों में larvicidal उपचार तथा नियमित फॉगिंग के बिना रोगों का प्रकोप रोकना असंभव है। उन्होंने कहा, “स्थिर जल को नष्ट कर ही हम डेंगू, चीकनगुनिया व फ्रेमेन्सी जैसी बीमारियों के अंधेरे को दूर कर सकते हैं”।
विभाग ने अगले दो हफ्तों में 150 प्रमुख रोगीभवन क्षेत्रों में फॉगिंग की योजना बनाई है और साथ ही 5,000 घरों में फील्ड निरीक्षणकर्ता भेजकर जलजमाव की तुरंत पहचान कर उपाय लागू करेंगे। इस बीच, स्थानीय जल बोर्ड से अनुरोध किया गया है कि जल निकासी की आवंटित पाइपलाइन की सफाई में लगाम लगाई जाए, क्योंकि कई जगहों पर जाम हो चुके नालों को साफ़ करना ‘वर्षा के बाद गड्ढे भरने के साथ ही मच्छरों को भी पार्टी देने’ जैसा प्रतीत होता है।
हालाँकि, नगर निगम की ओर से जलजमाव की समस्या को लेकर कई बार चेतावनियाँ जारी करने के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए जाने की शिकायतें आम नागरिकों की आवाज़ में सुनाई देती हैं। पिछले वर्ष भी समान रिपोर्टें थी, फिर भी आज तक कई बड़े इलाकों में जलभराव के कारण उपजाऊ मच्छर अंडे बनते रहे। यह पुनरावृत्ति दर्शाती है कि “सतत निगरानी” की शाब्दिक अर्थव्यवस्था में अभी भी ‘सतत’ शब्द को अधूरी समझा जा रहा है।
नगर पालिका ने इस बात को स्वीकार किया कि बजट आवंटन में देरी और पुरानी तकनीक के कारण फॉगिंग के प्रोग्राम में अंतराल रहता है। उन्होंने कहा कि नवीन GIS‑आधारित मैपिंग प्रणाली को जल्द लागू किया जाएगा, जिससे जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान ‘परदे के पीछे’ नहीं, बल्कि रियल‑टाइम में की जा सकेगी।
सार्वजनिक सहयोग भी अनिवार्य है, स्वास्थ्य विभाग ने निवासियों से अनुरोध किया कि गंदगी जमा न हों, पाइपलाइन में रेत या कूड़ा ना डालें और जलजमाव वाले क्षेत्रों को तुरंत नगर निगम को रिपोर्ट करें। “सड़क साफ़ रखनी है तो गली में पक्का पानी नहीं होना चाहिए,” यह वाक्य कई नागरिकों के सोशल‑मीडिया पोस्ट में कई बार दोहराया गया, जो सरकार की नज़र में एक सूचनात्मक अनुस्मारक बन चुका है।
परिणाम स्वरूप, यदि जल निकासी और फॉगिंग में समयबद्धता और पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो अगले दो महीनों में रोग मामलों में संभावित 30‑40% की वृद्धि देखी जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संभावित जोखिम को न्यूनतम करने के लिये स्थानीय NGOs और नागरिक समूहों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाने का भी प्रस्ताव रखा है।
Published: May 8, 2026