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इंडिगो की उड़ान में पावर‑बैंक आग से चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर आपात स्थिति, सुरक्षा जांच पर सवाल

चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर कल शाम एक इंडिगो के घरेलू उड़ान (फ्लाइट 8E‑372) के लैंडिंग के तुरंत बाद कार्गो कम्पार्टमेंट में पावर‑बैंक से धधकती आग का प्रकरण सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, आग ने कॉकपिट के बगल में स्थित उड़ान में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को जला दिया, जिससे तत्काल आपातकालीन निकासी की घोषणा हुई।

क्लरक दल की तेज़ कार्रवाई से आग को बुनियादी उपकरणों के उपयोग से बुझा दिया गया, परंतु निकासी के दौरान दो यात्रियों को हल्की चोटें आईं और कुल मिलाकर छह यात्रियों को उपचार हेतु चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। फिजियोथेरेपी और नर्सिंग स्टाफ के सहारे प्रभावित यात्रियों को क्रमशः टर्मिनल पर ले जाया गया।

इस घटना ने पावर‑बैंक जैसे प्रतिबंधित वस्तुओं की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को फिर से सवाल के घेरे में ला दिया। भारतीय नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (DGCA) ने पहले ही इलेक्ट्रॉनिक बैटरियों के ले जाने के टेबलो को सख्त बनाने का निर्देश जारी किया था, परंतु चंडीगढ़ में लागू निगरानी तंत्र के प्रभावशीलता पर अब आलोचनात्मक चर्चा चल रही है। स्थानीय एअरपोर्ट अथॉरिटी (CAA) और हवाई अड्डा प्रबंधन को बताया गया है कि वे वर्तमान सुरक्षा प्रोटोकॉल की जाँच कर, संभावित चूक को समाप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण और उपकरणों की व्यवस्था करेंगे।

वर्तमान में चंडीगढ़ पुलिस ने घटना की जाँच के लिए एक विशेष टीम स्थापित कर ली है। पुलिस ने कहा कि जाँच में यह भी देखा जाएगा कि क्या पावर‑बैंक को सही प्रकार से पैक किया गया था या उसे कॉकपिट के पास रखने की अनुमति थी। यदि कोई चूक सिद्ध होती है, तो एयरलाइंस को नियामक दंड और यात्रियों को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है।

स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। जबकि अधिकांश यात्रियों ने चालक दल की शीघ्र प्रतिक्रिया की सराहना की, कई ने कहा कि निकासी के समय स्पष्ट संचार की कमी और प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों की कमी ने स्थिति को व्यावहारिक रूप से और कठिन बना दिया। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे की तीखी चर्चा हो रही है, जहाँ विशेषज्ञों ने कहा कि पावर‑बैंक जैसे लिथियम‑आयन बैटरियों का उचित निरीक्षण न केवल तकनीकी, बल्कि प्रबंधन स्तर पर भी निरंतर निगरानी की मांग करता है।

आगे के कदम के तौर पर, चंडीगढ़ हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि अगले दो हफ्तों में सभी एयरलाइन टर्मिनलों पर मोबाइल उपकरणों के लिए अतिरिक्त X‑रे जांच केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, DGCA के साथ मिलकर एक व्यापक ऑडिट आयोजित किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

यह घटना इस बात की याद दिला गई है कि तेजी से बढ़ते हवाई यातायात और यात्रियों द्वारा साथ ले जाने वाले गैजेट्स के बीच सुरक्षा प्रणालियों को निरंतर अद्यतन रखना अनिवार्य है—भले ही इसका अर्थ हो कि हवाई अड्डे के प्रोटोकॉल में ‘बड़ी बोर’ बातों को भी पुन: दर्शाना पड़े।

Published: May 6, 2026