अहमदाबाद में पशु काटने की घटनाएँ बढ़ीं, बिल्लियों के हमले 156% तक पहुँचे
अहमदाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष प्रथम तिमाही में पशु द्वारा काटे जाने की रिपोर्टों में 28% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष रूप से, बिल्लियों के हमले 156% तक उछाल देखा गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से तीन गुना अधिक है।
विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस वृद्धि का मुख्य कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बेतरतीब ढंग से पालतू एवं आवारा बिल्लियों की बढ़ती संख्या है। साथ ही, बिल्लियों के व्यवहार में परिवर्तन, जैसे अधिक शत्रुता और उपजाऊ प्रजनन‑प्रसव, ने इस प्रवृत्ति को तीव्र किया है।
नगर प्रशासन ने तत्काल कदम उठाने का आश्वासन दिया है, पर वास्तविक कार्यवाही में अभी भी ‘सूत्रधार’ की कमी दिख रही है। मौजूदा कुपोषण‑रहित ब्रीडिंग‑सेंटरों की संख्या 12 से घटकर 8 हो गई है, जबकि बिल्लियों की अनुमानित जनसंख्या 25,000 से अधिक तक पहुंच गई है। प्रशासन द्वारा घोषित ‘कुत्रा‑बिल्ली नियंत्रण योजना’ का बजट 2025‑26 में 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.5 करोड़ रुपये किया गया, पर यह राशि अभी तक लागू नहीं हुई।
नागरिकों पर इस प्रकोप का सीधा असर पड़ रहा है। डॉक्टरों के सर्वेक्षण में बताया गया है कि पशु काटने के कारण अस्पताल में दाखिला 18% बढ़ा है, जबकि एंटी‑रबिस वैक्सिन की उपलब्धता सीमित होने के कारण कई लोगों को वैकल्पिक उपचार पर निर्भर रहना पड़ा। सामाजिक मंचों पर “बिल्ली‑बाइट” टैग वाले पोस्टों की संख्या में वृद्धि ने इस मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना दिया है।
विषयगत विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पशु‑नियंत्रण के माध्यम से इस समस्या का समाधान संभव नहीं। उन्हें सुझाव देते हुए कहा गया है कि ‘प्लेज़ा पहल’ के तहत निवारक टीकाकरण, जागरूकता अभियानों और स्थायी दरियाई बिल्लियों के निरोध के लिए वैध पंजीकरण प्रणाली लागू करनी चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया को देखते हुए, शहर की “सुगम ट्रैफ़िक योजना” जैसी बड़ी उपलब्धियों की तुलना में, पशु‑नियंत्रण में निरंतर देरी एक विडंबनापूर्ण संकेत बनाती है। जब सड़कों पर लाल बत्ती को बदलने की योजना बन रही है, तो बिल्लियों के ‘लाल‑सावधानी’ संकेत क्यों नहीं लगाए जाते?
अंततः, नगर निगम को इस बढ़ती समस्या को स्थानीय प्रशासनिक क्षमता और बजट के साथ संतुलित करके शीघ्रता से निपटना होगा, ताकि नागरिकों को जीवजंतुओं से नहीं, बल्कि अपने शहर की विकासशीलता से डरना पड़े।
Published: May 4, 2026