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अहमदाबाद में पानी के बहस में मित्र पर मारपीट, आरोपी को दार्शनिक बंधन में रखा गया

अहमदाबाद मेवाड़ नगर पालिका की जल आपूर्ति प्रणाली की लगातार गिरावट ने एक साधारण दोस्ती को भी जंगली मैदान में बदल दिया। 28 अप्रैल को शैफाल-सिटी के एक उपनगर में, गाутम सोलंकी (42) ने अपने मित्र विशाल मकवाना (40) पर टॉर्ची के आकार के एक लाठी से प्रहार किया, जब दोनों के बीच प्यास बुझाने के साधन‑पानी के बारे में तीखी बहस छिड़ गई।

घटना के बाद तुरंत स्थानीय पुलिस ने दर्ज़ की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के आधार पर सोलंकी को हिरासत में ले लिया। मकवाना को हल्के चोटें लगीं; उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि मामला ‘सहज मित्रता की छोटी‑सी टकराव’ के रूप में दर्ज़ किया गया, परंतु पुलिस ने ‘सुनिश्चित किया कि ऐसे मामूली विवाद भी स्थानीय सामुदायिक शांति को प्रभावित न करें’।

अहमदाबाद में जल वितरण की कमी पिछले कई वर्षों से नागरिकों के बीच तनाव का कारण बनी है। संस्थागत पानी कटौती, पुरानी पाइपलाइन और अनियमित एमसीआर एंट्री की वजह से कई क्षेत्रों में लोग टंकर व वैक्यूम टैंक पर निर्भर हैं। इस पृष्ठभूमि में, पानी की उपलब्धता पर छोटे‑छोटे विवाद बड़े‑बड़े झगड़े में बदलना अब दुर्लभ नहीं रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के प्रति सार्वजनिक जागरूकता के साथ-साथ सच्ची जल नीति में सुधार न हो तो ऐसे “मित्र‑के‑विरोध‑में‑हिंसा” के मामले और भी बढ़ेंगे।

शहर के जल विभाग के अधिकारी ने कहा कि मौजूदा आपूर्ति योजना को पुनः देखने की आवश्यकता है, जबकि वॉटर‑ट्रांसफर सिड्यूल को मौसमी बदलते मौसम के अनुसार संशोधित किया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जल आपूर्ति में अंतराल पर निपटने के लिए ऑटॉमेटेड माप उपकरण और पारदर्शी बिलिंग प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे नागरिकों के बीच “पानी पर टकराव” की संभावनाएँ घट सकें।

सोलंकी के वकील ने न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपित हमला उदासीनता और एक क्षणिक गुस्से से हुआ, न कि पूर्वनिर्धारित हिंसा से। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी ने अब तक किसी भी जल‑सम्बन्धी सार्वजनिक सेवा में कोई अनैतिक कार्य नहीं किया है। यह दावा स्थानीय प्रशासन के लिए अजीब है, क्योंकि जल‑संकट के खीले‑ख़ीले माहौल में व्यक्तिगत विवाद को निर्धारित करने के लिए निर्णायक प्रमाण की आवश्यकता होती है।

इसी बीच, नागरिक समूह “शहरी जल अधिकार” ने पुलिस को इस प्रकार के मामलों के प्रति ‘समुचित सामाजिक‑रिपोर्टिंग’ की मांग की। उन्होंने कहा, “एक जल‑संकट की स्थिति में व्यक्तिगत विवाद को अपराध मानना, अंततः प्रशासन की असफलता को मौखिक रूप में उजागर कर रहा है।” यह टिप्पणी सूखा व्यंग्य से परिपूर्ण है, परन्तु इसकी सच्चाई आज के अहमदाबाद में क़रीब-क़रीब विवादित ही है।

Published: May 4, 2026