अभाजमर में ‘माओवाद विरोधी बल’ बन गए पोषण निरीक्षक: सरकारी स्वास्थ्य योजना की कमियों पर सवाल
छत्तीसगढ़ के अभाजमर में, माओवाद विरोधी सुरक्षा बलों ने अपने पारंपरिक कर्तव्यों से हटकर बच्चों में कुपोषण की पहचान करने में मदद की। हाल ही में जिला अधिकारी ने बताया कि जब ये दल गाँव‑गाँव का सर्वेक्षण कर रहे थे, तो उन्होंने 187 बच्चों में गंभीर पोषण कमी के संकेत पाए। यह डेटा स्वास्थ्य विभाग को तुरंत सौंपा गया, जिससे तत्काल पोषण‑सहायक कार्यक्रम शुरू किया गया।
परिस्थिति की जड़ें अधिक जटिल हैं। अभाजमर जैसे दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण अक्सर नहीं हो पाता। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या अपर्याप्त है, डॉक्टर‑नर्स की कमी और सड़क‑बुनियादी ढाँचे की समस्या इससे और बढ़ जाती है। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बलों को ‘अस्थायी पोषण निरीक्षक’ के रूप में तैनात किया।
डिस्ट्रिक्ट मेडीकल ऑफिसर ने बताया कि इस पहल के तहत सुरक्षा कर्मियों ने स्कूल‑कंट्रीस्टेशन और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ मिलकर “मलन्यूट्रीशन स्पॉटर” का कार्य किया। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया केवल प्रारम्भिक पहचान तक सीमित रहेगी; उसके बाद फॉलो‑अप उपचार, पोषण पैकेज वितरण और नियमित वजन‑ऊँचाई माप के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी जिम्मेदार होंगे।
हालाँकि, इस अतिरिक्त भूमिका ने प्रशासनिक समन्वय में कई सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों को स्वास्थ्य कार्यों में उपयोग करना केवल अस्थायी उपाय हो सकता है, जबकि मूल समस्या — बुनियादी स्वास्थ्य‑सेवाओं की अनुपस्थिति — को सुलझाने के लिए स्थायी समाधान चाहिए। अधिकतम समय तक सुरक्षा कर्मियों को स्वास्थ्य निरीक्षण में जोड़ना उनके मूल कर्तव्य, यानी सुरक्षा, से ध्यान भटकाने की संभावना रखता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कदम को सराहा, परन्तु उन्होंने कहा कि “पोषण‑निरीक्षण के बाद वास्तविक खाद्य सहायता, आय समर्थन और शिक्षा‑केंद्रित कार्यक्रमों के बिना सकारात्मक बदलाव की संभावनाएँ सीमित रहेंगी”। उन्होंने जिले से अनुरोध किया कि तात्कालिक खाद्य‑सप्लाई, मातृ‑शिशु स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और नियमित मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयाँ चलाने पर प्राथमिकता दें।
आधिकारिक तौर पर, चीरापुत्र जिले ने अगले तीन महीनों में 1.5 करोड़ रुपये की राशि विशेष पोषण योजना के लिए आवंटित की है। इसमें पोषण‑समृद्ध ब्रेड, आयरन‑फोलिक सप्लीमेंट और स्कूल‑मेंटरिंग प्रोग्राम शामिल होंगे। परन्तु इस अस्थायी उपाय की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह एक टिकाऊ स्वास्थ्य‑सेवा नेटवर्क के निर्माण की दिशा में कदम है, या केवल सुरक्षा‑बलों के पास एक अतिरिक्त “जॉब डिस्क्रीप्शन” बन गया है।
संक्षेप में, अभाजमर में माओवाद विरोधी बलों की नई भूमिका ने यह स्पष्ट कर दिया कि बुनियादी प्रशासनिक ढाँचा कितनी कमजोर है। यह कदम स्थानीय सरकार को प्रेरित कर सकता है कि वह स्वास्थ्य‑सेवा में बहु‑स्तरीय सहयोग को सुदृढ़ करे, न कि केवल संकट‑स्थिति में सुरक्षा कर्मियों पर निर्भरता बढ़ाए।
Published: May 4, 2026