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अकाल तत्थ ने पंजाब स्पीकर को नए अधोसंहार विरोधी विधेयक पर बुलाया

पंजाब सरकार ने हाल ही में एक नया "अधोसंहार विरोधी अधिनियम" प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को रक्षण करना बताया गया है। लेकिन इस विधेयक की तैयारियों में प्रमुख धार्मिक संस्था अकाल तत्थ का कोई भी परामर्श नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने 8 मई को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष को सम्मनित किया।

अकाल तत्थ, जो सिख धर्म का सर्वोच्च धार्मिक परिषद है, ने बताया कि विधेयक के अप्रकाशित ड्राफ्ट में पुलिस को धारा‑6 के तहत "धार्मिक शत्रुता" की परिभाषा को व्यापक रूप से विस्तृत किया गया है, जिससे आम नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर छाया पड़ सकती है। संस्थान ने कहा, "किसी भी कानून को लागू करने से पहले उन लोगों से चर्चा करना आवश्यक है, जिनकी जीवनशैली और संवेदनाएँ सीधे प्रभावित होंगी।"

विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में सिख धरोहरों पर हुए अभूतपूर्व उल्लंघन को रोकना अनिवार्य है। वहीं, कई कानूनी विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि परिभाषा अस्पष्ट रहती है तो इसे गलत तरीके से इस्तेमाल करके किसी भी वर्ग के खिलाफ मुकदमा दायर किया जा सकता है।

राज्य प्रशासन ने बताया कि विधेयक का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के बिना तैयार किया गया, क्योंकि यह तुरंत प्रभावी स्वरूप में लाने की इच्छा रखी गई थी। इससे स्थानीय शासन में पारदर्शिता की कमी की कठोर आलोचना की जा रही है। इस पहल ने नागरिक समूहों को भी असहज कर दिया; कई क़स्बों और नगरांकों में इस बात की चिंता प्रकट हुई कि पुलिस की नई पुलिसिंग शक्ति से रोज़मर्रा की झगड़े भी दंडनीय बन सकते हैं।

अकाल तत्थ के सम्मन के बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह 8 मई को आयोजित चर्चा में सरकार की स्थिति सुनेंगे और आवश्यक संशोधन पर विचार करेंगे। यदि बात बन जाती है तो विधेयक में स्पष्ट परिभाषा, सीमित दण्ड और सख्त दायरे की उम्मीद की जा रही है। नतीजतन, नियम बनाने में परामर्श की कमी को लेकर इस बार की राजनीतिक टकराव स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाहियों पर सवाल उठाता है।

जैसे ही कानून बनते हैं, वैसे ही उसकी कार्यान्वयन की जटिलताओं का भी अनुमान लगाना पड़ता है—विकास के नाम पर तैयार किए गए प्रत्येक कागज पर सावधानीपूर्वक ‘सभी पक्षों से परामर्श’ लेबल लगाना, प्रशासन की नई नीति बननी चाहिए।

Published: May 4, 2026