SPU पिच सत्र में पाँच स्टार्टअप को फंड, शहर की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक, शीयरिया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SPU) ने 4 मई को आयोजित पिच सत्र में सात प्रस्तुतियों में से पाँच को प्रारम्भिक फंडिंग प्रदान की। कुल मिलाकर 1.2 करोड़ रुपये के निवेश का संकलन हुआ, जिसमें स्थानीय एंजेल निवेशकों, राज्य स्तरीय स्टार्टअप इनक्यूबेटर और नगर निगम की पहल के तहत स्थापित ‘स्टार्टअप सपोर्ट बॉन्ड’ शामिल थे।
फंड प्राप्त करने वाले उद्यमों ने स्वास्थ्य‑तकनीक, एग्री‑टेक, शहरी गतिशीलता, छोटे व्यापार प्रबंधन तथा सतत ऊर्जा समाधान जैसे विभिन्न क्षेत्रों को कवर किया। इनका दावा है कि उनके प्रोटोटाइप शहरी जीवन की कुछ मौजूदा परेशानियों—जैसे बिखरे हुए कचरे का प्रबंधन, असमान इंटरनेट कवरेज और छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान की अड़चन—को सरल बनायेंगे।
हालाँकि, इस उपलब्धि के पीछे शहर की बुनियादी सुविधाओं की कड़ी वास्तविकता छिपी हुई है। पिच सत्र के दौरान प्रस्तुतियों में कई बार कहा गया कि विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और हाई‑स्पीड इंटरनेट नहीं होने के कारण Prototype परीक्षण में बाधाएँ आती हैं। नगर निगम के हालिया बयान में कहा गया कि ‘डिजिटल भारत’ के आध्बिकरण के तहत 2025 में शहर को 4G/5G कवरेज प्रदान किया जाएगा, परंतु लक्षणिक रूप से अभी भी कई क्षेत्रों में सिग्नल की “इंटरनेट‑फ्रीज़” स्थिति बनी हुई है।
शहर के प्रमुख अधिकारी, नगर उप-कायक्रम अधिकारी अंजली सिन्हा ने कहा, “हम स्टार्टअप इकोसिस्टम को पोषित करने के लिए आवश्यक बुनियादी संरचना निर्माण पर कार्यरत हैं, परंतु बजट सीमाएँ और मोर्चे‑प्रमुख शर्तें कभी‑कभी योजना के टाईमर को धीमा कर देती हैं।” यह टिप्पणी सुनते ही कई स्थानीय उद्यमियों ने सोशल‑मीडिया पर सूखा व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, “उप‑कायक्रम अधिकारी का कहना है कि ‘बजट’ है, पर ऐसा लग रहा है कि बजट में ‘कनेक्शन’ को पहले से ही छुट्टियों पर भेज दिया गया है।”
निवेशकों की भी इस बात से अनभिज्ञ नहीं हैं कि फंडिंग प्राप्त करने वाले स्टार्टअप जल्द ही उत्पादन चरण में प्रवेश करेंगे, परंतु उन्हें स्थानीय प्रशासन से निरंतर समर्थन की आवश्यकता होगी। विशेष रूप से, वार्षिक फंडिंग के बाद अभिकर्तृ निकायों से मिलने वाली सप्लाई चैन, कचरा प्रबंधन सेवाओं और सड़कों की स्थिति को लेकर स्पष्ट रूपरेखा की माँग बढ़ी है।
आगे देखते हुए, शहर में शहरी नवाचार को स्थायी बनाने के लिए दो प्रमुख कदम आवश्यक हैं: पहला, विद्युत और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं को रणनीतिक रूप से सुदृढ़ करना; दूसरा, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर स्टार्टअप्स को तेज़ी से लाइसेंस, अनुमति और पब्लिक‑प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) की सुविधा देना। इन सुधारों के अभाव में, आज की सफलता केवल “पिच सत्र की चमक” ही रह जाएगी, और कल के वास्तविक उपयोगकर्ता को वही पुराना ‘बिजली‑कट‑और‑इंटरनेट‑ड्रॉप’ सामना करना पड़ेगा।
Published: May 4, 2026