SGCCI चुनाव में अविश्वसनीय 15.88% ही मतदाता प्रवाह, नागरिक भागीदारी पर सवाल
शहर के सिविक ग्रूप कॉरपोरेशन (SGCCI) द्वारा आयोजित पॉल में मतदाता टर्नआउट रिकॉर्ड स्तर पर गिरा। 2 मई को हुए मतदान में केवल 15.88 प्रतिशत योग्य मतदाता ही सत्र में शामिल हुए, जबकि आधिकारिक अनुमान 55‑60 प्रतिशत था। इस असाधारण गिरावट ने न केवल चुनावी प्रक्रिया बल्कि स्थानीय शासन की वैधता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अध्यक्ष महाविद्यालय श्यामसुंदर अग्रवाल ने कहा, “यदि इस बार के मतदाता आँकड़े ही भविष्य की भागीदारी का संकेत हों, तो नागरिकों की मतभेद के प्रति उदासीनता का स्तर शहरी प्रशासन की असफलता को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोजित करने वाले निकाय को अगली बार मतदान जागरूकता कार्यक्रमों को दो गुना करने का आदेश दिया गया है।
विषय विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई निकटवर्ती कारण हैं। पहली, सूचना प्रसार में गंभीर खामियां – अधिकांश निवासियों को मतदान स्थल और समय की सही जानकारी नहीं मिल पाई। दूसरी, मतदान केंद्रों के अपर्यापत स्थान चयन – कई क्षेत्रों में एक पॉल ही कई हजार नागरिकों को संभालने के लिए निर्धारित था, जिससे भीड़ और असुविधा बढ़ी। तीसरी, निरंतर जल एवं बिजली कटौती, सड़कों की घातक स्थिति, तथा कचरा प्रबंधन की विफलता ने नागरिकों को स्थानीय प्रशासन में भरोसा खोने पर मजबूर किया।
नागरिक संगठनों ने भी इस परिणाम को “डेमोक्रेसी के सिर पर टंक्या” के रूप में वर्णित किया। शताब्दी मार्केट में स्थित बयरोज़ सीविक मंच के अध्यक्ष मनोज सिंह ने कहा, “जब पानी की टैंकी खाली हो, सड़कों में गड्ढे खड़े हों, और कचरा ढेर में बदल जाए, तो मतदान बॉक्स में कागज़ डालने की इच्छा स्वाभाविक रूप से घटती है।” उन्होंने प्रशासन से तत्काल बुनियादी सुविधाओं में सुधार का आह्वान किया, नहीं तो कोई भी चुनावी पहल सराव रहेगी।
प्रशासन ने तत्पश्चात एक आपातकालीन बैठक बुलाकर आगामी तीन महीनों में डिजिटल मतदान, मोबाइल पॉल और द्वितीयक सूचना अभियान लागू करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, आलोचक इस प्रस्ताव को “व्यवस्था के संकट में डूबे अभ्यर्थियों की अस्थायी राहत” कह कर खारिज कर रहे हैं, क्योंकि बुनियादी बुनियादी ढाँचे की ठीक‑ठाक स्थिति के बिना तकनीकी नवाचार का कोई असर नहीं रहेगा।
अंत में, 15.88 प्रतिशत की अपरिचित संख्या यह संकेत देती है कि न केवल चुनावी प्रक्रिया, बल्कि शहरी प्रशासन की मूलभूत जिम्मेदारी – नागरिकों को सुनना, उनकी समस्याओं को हल करना और लोकतंत्र को वास्तविक बनाना – गंभीर रूप से प्रश्नाभास में है। यदि आगामी शासकों ने इस अंकेक्षण को शीघ्रता से सुधार नहीं किया, तो अगला चुनाव शायद और भी खाली बॉक्स लेकर आएगा।
Published: May 3, 2026