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Maharashtra ने 11वीं लगातार साल भ्रष्टाचार चार्ट में शीर्ष स्थान प्राप्त किया: NCRB 2024 रिपोर्ट

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट ने फिर से एक ही राज्यमेंँ दोहरावदार रिकॉर्ड प्रस्तुत किया – महाराष्ट्र ने भ्रष्टाचार मामलों में लगातार ग्यारहवीं बार राष्ट्रीय शीर्ष स्थान सुरक्षित किया। कुल 14,128 दर्ज मामलों के साथ राज्य ने औसत 13.7 % वार्षिक वृद्धि दिखायी, जबकि कई अन्य राज्यों में गिरावट दर्ज की गई।

भ्रष्टाचार की बढ़ोतरी के पीछे कई कारणों की ओर इशारा किया जा रहा है। राज्य स्तर पर भारी विनियमित लाइसेंसिंग प्रक्रिया, भूमि‑बाजार में अनियमित लेन‑देन, और शहरी निकायों में अनुबंधों की पारदर्शिता की कमी को प्रमुख कारण माना गया है। इसके अतिरिक्त, कई नगरपालिकाओं में अनुचित संपत्ति अधिग्रहण, मिश्रित सार्वजनिक‑निजी साझेदारी परियोजनाओं में गड़बड़ी, तथा सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में ‘सुविधा‑भुक्ति’ की प्रथा ने मामलों की संख्या को इग्नोर करना कठिन बना दिया है।

राज्य प्रशासन ने इस रिपोर्ट को ‘परिचालनिक सुधार के अवसर’ के रूप में प्रस्तुत किया, और ‘कुशल निरीक्षण तंत्र एवं डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से भ्रष्टाचार को कम करने’ का वादा किया। परन्तु पिछले दस वर्षों में प्रस्तावित कई पहलें – जैसे ऑनलाइन बिलिंग पोर्टल, पास‑पोर्टल आदि – वास्तविकता में सीमित स्तर पर ही काम कर पाईं, अक्सर तकनीकी दिक्कतों और प्रशासनिक अनिच्छा का सामना करती रहीं।

नागरिकों पर इसका प्रत्यक्ष असर स्पष्ट है। सड़कों के निर्माण, जल एवं स्वच्छता सेवाओं, तथा शहरी विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी, प्रक्रिया में अतिरिक्त खर्च, और अंतिम लाभार्थी तक सेवाओं का न पहुँच पाना, इस श्रृंखला के मुख्य परिणाम हैं। कई उपनगरों में आवासीय प्लॉटों के वितरण में ‘बुटीक योजना’ का चलन, जहाँ जमीन के बदले ‘भुगतान’ की अपेक्षा की जाती है, ने सामाजिक असमानता को और गहरा किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़े ही नहीं, बल्कि उन आँकड़ों के पीछे की ‘कार्रवाई‑निष्ठा’ का परीक्षण करना आवश्यक है। यदि राज्य ऊँचे मामलों की रिपोर्टिंग को पारदर्शी मानता है, तो उसे उसी मौलिक संकल्प को लागू करने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए – जैसे सख़्त अनुशासन, स्वायत्त जांच आयोग, और सार्वजनिक हित में डेटा‑संचालित निर्णय‑प्रक्रिया। अन्यथा, शीर्ष पर रहना केवल ‘साख‑वृद्धि’ का एक और अंकन बनकर रह जाएगा।

Published: May 8, 2026