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GMCH में वैंटिलेटर की कमी, पीएम केयरस के उपकरण भी नहीं कर रहे पर्याप्त मदद
गुड़िया के प्रमुख मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (GMCH) को आज भी वैंटिलेटर की तीव्र कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पीएम केयरस फंड के तहत केंद्र सरकार ने इस वर्ष अस्पताल को एक विस्तृत बेड़ा सौंपा था। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में उपलब्ध ५० वैंटिलेटर केवल ७० से अधिक गंभीर श्वसन रोगियों को संभाल सकते हैं, जिससे कई रोगियों को निकटतम निजी संस्थानों में स्थानांतरित करना पड़ रहा है।
पिछले महीने राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि पीएम केयरस द्वारा प्रदान किए गए २० वैंटिलेटरों को जल्द ही स्थापित कर दिया जाएगा, लेकिन तकनीकी संगतता, प्रशिक्षण की कमी और रखरखाव समस्याओं के कारण ये उपकरण अभी भी बेकार पडे़ हैं। अस्पताल का उपकरण प्रबंधक ने बताया कि अधिकांश नई मशीनें पुरानी इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ संगत नहीं हैं, जिससे उन्हें चालू करने के लिए अतिरिक्त रूपांतरण कार्य की आवश्यकता है—एक काम जो अब तक बकाया रह गया है।
नगर प्रशासन की तरफ से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया मिली है। नगर महानगर निगम (NMC) के जल व स्वच्छता विभाग के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर वैंटिलेटर की आपूर्ति में बाधा डालने वाले लॉजिस्टिकल बिंदुओं की पहचान की है, और “जल्द ही एक बहु-स्तरीय निगरानी समिति” गठित की जाएगी। हालांकि, यह घोषणा केवल काग़ज़ी शब्दों तक सीमित प्रतीत होती है, क्योंकि वैंटिलेटर की वास्तविक उपलब्धता में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखा।
मरीजों और उनके परिजनों पर पड़े प्रभाव स्पष्ट है। कई परिवारों ने सोशल मीडिया पर अस्पताल के बाहर लंबी कतारों की तस्वीरें साझा की हैं, जहाँ वे अपनी आशा और निराशा दोनों को एक साथ झेल रहे हैं। कुछ ने बताया कि उन्हें टेले‑फोन पर वैंटिलेटर की उपलब्धता की पुष्टि नहीं हो पाई, जबकि दूसरे ने कहा कि उनके प्रियजन को वैंटिलेटर की कमी के कारण अंततः मृत्यु हो गई।
इस स्थिति पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयारी बनाम उपकरण की बुनियादी उपलब्धता’ की दोहरी समस्या की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “किसी भी महामारी या अचानक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा में केवल उपकरणों की संख्या नहीं, बल्कि उनका सही उपयोग, रखरखाव और प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी भी आवश्यक है। पीएम केयरस के योगदान को सराहना योग्य है, परन्तु बिना कार्यान्वयन के यह केवल शोभा ही है।”
समान्य नागरिकों की आय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को देखते हुए, ऐसी स्वास्थ्य सेवा की असमानता केवल असहायता के भाव को ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न भी उठाती है। स्थानीय निकायों से अपेक्षा है कि वे न केवल उपकरणों की पूर्ति, बल्कि उनकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और रखरखाव व्यवस्था को तुरंत लागू करें, ताकि भविष्य में ऐसी ही सुनहरी घोषणाओं के बाद भी “बेकार वैंटिलेटर” की कहानी दोहराई न जाये।
Published: May 7, 2026