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DSMNRU को आईआईटी रोड़की के वर्चुअल लैब का मुफ्त प्रयोगकाल मिलेगा

दिल्ली विश्वविद्यालय के डीएसएमएनआरयू (डॉ. सतीश मेहता राष्ट्रीय विश्वविद्यालय) ने आज उत्तराखंड स्थित आईआईटी रोड़की के वर्चुअल प्रयोगशालाओं तक मुफ्त पहुँच के लिए समझौता किया। यह समझौता राज्य शिक्षा विभाग की मंजूरी के बाद दो विश्वविद्यालयों के प्रमुखों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया, जिसमें दो साल की अवधि के लिए 5,000 से अधिक प्रयोगात्मक मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाएंगे।

वर्चुअल लैब, जो क्लाउड‑आधारित सिमुलेशन और रीयल‑टाइम डेटा विश्लेषण प्रदान करती हैं, को छात्रों के प्रोजेक्ट और थेसिस कार्य में उपयोग करने की योजना है। प्रशासन का तर्क है कि इससे छात्रों को महंगे फिजिकल सेट‑अप की आवश्यकता के बिना उच्च‑स्तरीय प्रयोग करने का अवसर मिलेगा, और साथ ही राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा में समानता लाने का कदम होगा।

परन्तु इस उदार पहल को स्थानीय निकायों के बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ तुलना किए बिना नहीं देखा जा सकता। कई बार मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि डीएसएमएनआरयू के कई विभागों में पुराने लैब उपकरण, खराब वेंटिलेशन और अपर्याप्त सुरक्षा मानक मौजूद हैं। इस संदर्भ में वर्चुअल लैब को ‘सभी समस्याओं का समाधान’ कहना एक ताज़ा धूम्रपात जैसा लग रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्यों वास्तविक प्रयोगशालाओं में निवेश को प्राथमिकता नहीं दी गई।

शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “वर्चुअल प्रयोगशालाएँ वर्तमान डिजिटल युग में शिक्षा को सुलभ बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि भौतिक इंफ़्रास्ट्रक्चर को नजरअंदाज़ किया जाए। हम इस सहयोग के साथ साथ मौजूदा लैबों के आधुनिकीकरण की दिशा में भी काम करेंगे।” यह टिप्पणी उन प्रबंधकों के लिए सूखी चुटीली याद दिला रही है कि ‘डिजिटल समाधान केवल तब काम देते हैं जब जमीन पर नींव ठोस हो’।

विद्यार्थियों ने इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन उनके बीच से एक आवाज़ ने कहा, “ऑनलाइन सिमुलेशन मददगार हैं, पर असली प्रयोगशाला में हाथों‑हाथ सीखना कहीं अधिक प्रभावी रहता है। अगर हमारे पास पूरी तरह कार्यशील लैब नहीं है, तो हमें सिर्फ़ स्क्रीन पर देख रहे प्रयोगों से संतुष्ट रहना पड़ेगा।” इस प्रकार, वर्चुअल लैब का प्रावधान तकनीकी उन्नति का प्रतीक तो है, पर साथ ही यह शैक्षणिक प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न भी उठाता है।

Published: May 7, 2026