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AKTU ने शिस्त और सामाजिक सेवा में भागीदारी के लिए अंक प्रदान करने का नया नियम लागू किया

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) ने छात्रों की शैक्षणिक मूल्यांकन में एक नया घटक जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया है। इस पहल के तहत, नियमित पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन और सामाजिक सेवा में सक्रिय भागीदारी को अतिरिक्त अंक प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय की इस घोषणा को शिक्षकों, अभिभावकों और छात्र कल्याण विभाग ने मिलकर तैयार किया, जिसका उद्देश्य ‘नागरिक चेतना’ को शैक्षणिक वातावरण में उकेरना है।

परिणामस्वरूप, वार्षिक टर्म‑इक्साम में उपस्थितियों के साथ-साथ स्वैच्छिक कार्य, सामुदायिक साफ‑सफाई, स्वरक्षण शिविर और स्थानीय सरकारी योजनाओं में सहयोग के लिए 5‑10 अंक तक का बोनस मिलेगा। यह बोनस विद्यार्थी के कुल CGPA में सीधे जुड़ता है, जिससे उनका ग्रेडिंग स्केल बदल सकता है।

हालाँकि इस कदम को कई शैक्षणिक फ्रेमवर्क को समकालिक करने के सकारात्मक प्रयास के रूप में सराहा गया है, परन्तु कुछ विभागीय वरिष्ठ शिक्षकों ने इसकी वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि “अंक‑आधारित प्रोत्साहन अक्सर औपचारिकता से भरपूर, लेकिन वास्तविक प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित नहीं करता” और यह छात्रों को कैडेंस के बजाय अंक‑रक्षित कार्यों की ओर मोड़ सकता है।

नगर प्रशासन और स्थानीय NGOs भी इस नई नीति से आशावादी हैं। जिला स्तर के सामाजिक विकास अधिकारी ने कहा, “जब छात्र अपने पड़ोस की समस्याओं में सक्रिय भागीदारी करेंगे, तो यह न केवल उनका व्यक्तिगत विकास करेगा, बल्कि नगर की बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार लाएगा।” वहीं, कुछ स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को “शिक्षा‑राजनीति का नया खेल” कहकर हल्की विडंबना भी जताई, क्योंकि अक्सर ऐसे कार्यक्रमों का पालन‑पोर्ता केवल कागज़ पर ही रह जाता है।

इस नीति के कार्यान्वयन के लिए विश्वविद्यालय ने एक विशेष निरीक्षण समिति गठित की है, जो प्रत्येक कॉलेज के छात्रों के सामाजिक सेवा रिकॉर्ड का वार्षिक ऑडिट करेगी। साथ ही, एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रमाणपत्र, समय‑सीमा और योगदान के प्रमाण जमा करने की व्यवस्था की गई है। निकट भविष्य में इस पोर्टल के डेटा को शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ मिलाकर ग्रेडिंग सॉफ्टवेयर में एन्कोड किया जाएगा।

छात्र संघ ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा कि “अंक‑बोनस की घोषणा सुनकर उत्साह तो बढ़ा, परन्तु वास्तविक कार्यभार और समय‑संकट को देखते हुए इसे सावधानी से लागू करना होगा।” इस बीच, कई छात्र इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या यह नया अंक‑प्रावधान उनके स्नातकाई समयसीमा को बढ़ाएगा या नहीं।

सारांशतः, AKTU का यह कदम शैक्षणिक ढाँचे में सामाजिक उत्तरदायित्व को सम्मिलित करने की साहसिक पहल है, परन्तु इसके सफल कार्यान्वयन के लिये स्पष्ट मानक, पारदर्शी मूल्यांकन और व्यावहारीक निगरानी आवश्यक होगी। नियोजित अंक‑बोनस वहन करने की क्षमता और वास्तविक सामाजिक परिवर्तन के बीच संतुलन बनाना ही इस नीति की सच्ची जाँच होगा।

Published: May 4, 2026