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6 साल की बच्ची के अपहरण के आरोपी पर पुलिस ने की घातक मुठभेड़

जिला मुख्यालय शहर की पुलिस ने कल सुबह 5 बजे एक सुनसान अल्पायुधी सड़क पर एक तेज़ी से चल रहे ऑपरेशन में दो संदिग्धों को मार गिराया। आरोप है कि ये दोनों ही 6 साल की नन्ही बच्ची के अपहरण के प्रमुख अंशधारी थे। स्थानीय प्रशासन ने बात‑बात में ही इस मुठभेड़ को ‘सुरक्षा‑संकल्प’ के रूप में पेश किया, जबकि नागरिक समाज ने प्रक्रिया के पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

संपूर्ण घटना का आरम्भ पिछले हफ्ते एक स्थानीय महिला नागरिक के द्वारा दर्ज की गई अटकलबाज़ी से हुआ, जिसमें बताया गया था कि दो अड़चन‑ग्रस्त स्वेच्छा‑सेवकों के समूह ने नजदीकी कस्बे के किनारे से एक लड़के‑लड़की का जबरन ले जाकर उस क्षेत्र के एक अज्ञात मकान में ले गए थे। नागरिक ने पुलिस को जानकारी देने के बाद, एक विशेष फ़ाइल बनाकर कार्यवाही शुरू करवाई।

पोलिस के अनुसार, ज्ञात अपराधी ‘रहमान सिंह’ (28) और ‘विवेक शुक्ला’ (31) को पहचान कर 24 घंटे से अधिक की जासूसी के बाद, एक अनजानी गली में घातक मुठभेड़ बनाने की योजना बनाई गई। पुलिस ने बताया कि एक बटालियन के 8 जवानों ने रात के सन्नाटा में दोनो आरोपी पर गोलाबारी की, जिसके बाद बचपन की आशा की पुकार सुनाई देनी रोकी गई।

हालांकि, कई नागरिक और मानवाधिकार समूहों ने इस ‘घातक मुठभेड़’ को ‘स्पर्धी न्याय’ की ओर इशारा किया। स्थानीय NGO ‘सुरक्षा संकल्प संघ’ के प्रमुख ने कहा, “एक दिन में साक्ष्य जमा करने की कोशिश में पुलिस घड़ी की सुई को भी घुमा देती है, परन्तु किस प्रकार के परिदृश्य में नागरिक के जीवन‑अधिकारों को ‘सुरक्षा’ शब्द के पीछे दबा दिया जाता है, इसका जवाब अभी भी नहीं दिया गया है।”

नगर निगम के प्रमुख ने इस घटना पर आधिकारिक टिप्पणी जारी की, जिसमें कहा गया कि “शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती से लागू करने हेतु हम सभी धाराएँ एक साथ लाने को तैयार हैं। यदि कोई भी कृत्य सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, तो इसे रोका जाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि मुठभेड़ के बाद 3 दिनों में एक स्वतंत्र ‘जांच कमेटी’ गठित की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवश्यकतानुसार प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं।

सामाजिक दिमाग अब दो धुनों में उलझा हुआ है: एक तरफ माँ‑बाप की राहत कि बच्ची अब सुरक्षित है; दूसरी तरफ मुठभेड़ की वैधता पर सवाल। किस प्रकार का न्याय मुठभेड़ के बाद भी ‘न्यायिक प्रक्रिया’ का पालन नहीं करता, यह जांच के सामने आएगा।

घटना के बाद नजदीकी स्कूलों और बाल कल्याण केंद्रों में सुरक्षा के उपाय तेज़ कर दिए गए हैं, और स्थानीय प्रशासन ने दो हफ्तों में सभी स्कूलों में ‘बाल सुरक्षा जागरूकता’ कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प किया है। यह कदम, यदि सही मायने में लागू किया गया, तो भविष्य में ऐसी “सावधानी” की आवश्यकता को कम कर सकता है।

वर्तमान में इस मुठभेड़ से जुड़ी कोई भी कानूनी कार्यवाही या रजिस्टर्ड FIR सार्वजनिक नहीं है, और न्यायालय द्वारा आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय नहीं हुई है। इस बीच, नगरवासियों की आशा है कि ‘सुरक्षा संकल्प’ शब्द के पीछे निहित शक्ति संतुलन को वास्तव में ‘समानता और प्रक्रिया के नियमों’ के साथ जोड़ दिया जाएगा।

Published: May 6, 2026