हॉरमूज़ जलडमरूमध्य में नई हमले से तेल कीमतों में कमी, भारत की आयात बिल और महंगाई पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम को झंझट में डालते हुए हॉरमूज़ जलडमरूमध्य में नई समुद्री हमले की खबरें सामने आईं, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी। इस माह के पहले सत्र में तेज़ी से बढ़ी ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई कीमतों ने मंगलवार को क्षणिक कमी देखी, लेकिन पिछले दिन की तेज़ी अभी भी बाजार के मनोबल को प्रभावित कर रही है।
बेंचमार्क कीमतें जर्मन डॉइचे बोरेंज के डेटा के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ने पिछले सत्र में 2.5 प्रतिशत की तेज़ी से 78 डॉलर प्रति बैरल का स्तर प्राप्त किया था। परन्तु आज के सत्र में 1.2 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह 77 डॉलर के आसपास स्थिर रही। इसी प्रकार, अमेरिकी WTI में 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जिससे तेल निर्यातकों और आयातकों के बीच जोखिम प्रीमियम घटा।
भारत विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और इनकी कुल आयात में लगभग 80 प्रतिशत तेल पर निर्भरता है। इसलिए वैश्विक मूल्य गति का सीधे भारतीय व्यापार संतुलन, रूढ़िवादी मुद्रा‑विनिमय दर और महंगाई पर ऐनुपातिक असर पड़ता है। कीमतों की इस अत्यधिक अस्थिरता से तेल आयात बिल में उतार‑चढ़ाव होगा, जिससे विदेशी मुद्रा बचत पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, पेट्रोल, डीज़ल और एटीएम में पेट्रोल के दाम तय होते हैं; कीमतों में उतार‑चढ़ाव का सीधा असर उपभोक्ता महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर पड़ेगा।
वित्त मंत्रालय और ऊर्जा विभाग ने मौजूदा रणनीतिक तेलभंडार (5.33 मिलियन बैरल) को 2–3 महीनों की आपूर्ति कवरेज के रूप में प्रदर्शित किया है, परन्तु यह स्तर तीव्र कीमतों के उतार‑चढ़ाव को सीमित करने में पर्याप्त नहीं माना जाता। मौजूदा मूल्य निर्धारण तंत्र, जहाँ पर भारतीय तेल निगम (IOC) के द्वारा ओपन मार्केट कॉररपोरेशन (OMC) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कीमतों को बेस प्राइस के रूप में स्वीकार किया जाता है, कीमतों में अचानक बदलाव को उपभोक्ता तक पहुंचाने से पहले कुछ मध्यमरीति प्रदान करता है, लेकिन दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता नहीं।
कॉरपोरेट सेक्टर में भी सुरक्षित हेजिंग रणनीति की कमी उजागर हो रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय तेल निगम और बायोएनरजी जैसी बड़ी कंपनियों ने फ्यूचर और विकल्प बाजार में सीमित भागीदारी दिखाई, जिससे आयात लागत में अचानक बदलाव के जोखिम को कम नहीं किया जा सका। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को कंपनियों को व्यापक हेजिंग उपकरणों तक पहुँच प्रदान करने के लिये नियामक ढाँचा सुदृढ़ करना चाहिए, और साथ ही नवीनीकृत ऊर्जा में निवेश को तेज़ करने के लिये दीर्घकालिक नीति समायोजन करना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, हॉरमूज़ में नई हमले से उत्पन्न अस्थिरता ने तेल कीमतों में अल्पकालिक गिरावट उत्पन्न की, परन्तु कीमतों की व्यापक असमानता और जोखिम प्रीमियम अभी भी उच्च बना हुआ है। भारत के लिए यह सन्देश स्पष्ट है: ऊर्जा आयात पर निर्भरता को घटाने, रणनीतिक भंडार को बड़ाने और हेजिंग एवं नवीकरणीय ऊर्जा के लिये नीति‑निर्माण को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वैश्विक भू‑राजनीतिक उथल‑पुथल का घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीधा असर कम किया जा सके।
Published: May 5, 2026