स्रीनिवासन और विजय सिंह ने टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से अपना पद छोड़ दिया
बेंगलुरु स्थित टाटा एजुकेशन ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्य, स्रीनिवासन और विजय सिंह, ने बोर्ड की बहुमत के विरोधी मत के बाद आधिकारिक रूप से अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। यह कदम ट्रस्ट के शैक्षिक पहलुओं और उसके वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा को तीव्र कर रहा है।
टाटा समूह के सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रमुख अंग के रूप में काम करने वाला टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, पिछले दशक में ग्रामीण और वंचित वर्गों के लिए लगभग ₹2,500 करोड़ की विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं में निवेश कर चुका है। इस वर्ष के शुरुआत में हुए वार्षिक सामान्य बैठक में, ट्रस्ट के निदेशक मंडल ने स्रीनिवासन और विजय सिंह के पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर 58% विरोधी वोट मिलाकर निर्णय उलट दिया। इस निर्णय के पीछे पारदर्शिता, निधियों के आवंटन और कड़ी निगरानी की माँगें थीं, जैसा कि कई उद्योग विशेषज्ञों ने बताया।
कर्मचारियों और शैक्षणिक संस्थानों ने इस विकसित होते परिदृश्य को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने कहा कि बोर्ड का कठोर रुख वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करेगा, जबकि अन्य ने चेतावनी दी कि प्रमुख अनुभवी नेताओं के प्रस्थान से चल रही परियोजनाओं में देरी और बजट ओवररन की संभावना बढ़ सकती है।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो टाटा एजुकेशन ट्रस्ट के प्रमुख कार्यक्रम, जैसे कि ग्रामीण स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म, के लिये निरंतर निधि प्रवाह आवश्यक है। यदि ट्रस्ट की गवर्नेंस में अस्थिरता बनी रहती है, तो इन योजनाओं के लिये अतिरिक्त निजी निवेश आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है, जिससे शिक्षा‑सेवा के विस्तार पर प्रभाव पड़ेगा।
नियामकीय प्राधिकरण, विशेष रूप से कंपनी हाउस और सामाजिक उत्तरदायित्व निगरानी बोर्ड, ने इस बदलाव को बारीकी से देखा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को अपनी वित्तीय रिपोर्टिंग, फंडिंग मीट्रिक और सामाजिक प्रभाव का खुलासा करने के लिए अधिक कड़े मानकों का पालन करना होगा, ताकि सार्वजनिक भरोसा बना रहे।
स्रीनिवासन और विजय सिंह के पदत्याग से टाटा समूह को अपने सामाजिक पहल को पुनः व्यवस्थित करने का अवसर मिल सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि समूह को इस समय नई, अधिक पारदर्शी गवर्नेंस मॉडल अपनाकर, युवा पेशेवरों और शैक्षिक विशेषज्ञों को बोर्ड में शामिल कर, भरोसा और संचालन दक्षता दोनों को बढ़ावा देना चाहिए। संभावित रूप से, यह बदलाव न केवल ट्रस्ट के शैक्षिक कार्यक्रमों को स्थिर करेगा, बल्कि भारतीय शिक्षा अभिव्यक्ति में निजी‑सार्वजनिक साझेदारी के लिए नया मानदंड स्थापित कर सकता है।
Published: May 5, 2026