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Category: व्यापार

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सेबी ने इन्भेस्टर रिस्क रिडक्शन एक्सेस (IRRA) प्लेटफ़ॉर्म को बंद किया, आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने का आदेश

भारत के प्रतिभूति बाजार नियामक सेबी ने आज तुरंत इन्भेस्टर रिस्क रिडक्शन एक्सेस (IRRA) प्लेटफ़ॉर्म को निरस्त करने का आदेश दिया। अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया यह तंत्र, जब बाजार में तीव्र अस्थिरता या तकनीकी विफलता होती है, तो ब्रोकर्स को सीमित जोखिम वाले ट्रेडिंग विकल्प प्रदान करने के लिए बनाया गया था। लेकिन सेबी ने बताया कि अब यह प्रणाली अनावश्यक हो गई है, क्योंकि ब्रोकर्स ने साइबर सुरक्षा, डिजास्टर रिकवरी और बिज़नेस कंटिन्यूटी (BC) के क्षेत्र में उन्नत तकनीकी समाधान अपना लिए हैं, और सभी प्रमुख एक्सचेंजों ने बैक‑अप ट्रेडिंग सुविधा उपलब्ध करवाई है।

सेबी की इस कदम के पीछे दो मुख्य आर्थिक तर्क हैं। पहला, ब्रोकर्स द्वारा अपनाई गई एन्हांस्ड साइबर‑सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और स्वचालित रिकवरी मैकेनिज़्म ने सिस्टम‑डाउntime की संभावनाओं को अत्यंत कम कर दिया है। दूसरा, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने आपातकालीन स्थितियों में समान ट्रेडिंग क्षमता प्रदान करने वाली ‘कंटिंजेंसी ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म’ (CTP) को आधिकारिक रूप से परिचित किया है, जिससे निवेशकों की सुरक्षा की दोहरी परत सुनिश्चित होती है।

बाजार प्रभाव की दृष्टि से, IRRA प्लेटफ़ॉर्म के बंद होने से ब्रोकर्स को कुछ तकनीकी अनुकूलन खर्चों से मुक्त किया जाएगा, जबकि छोटे ब्रोकर्स को बैक‑अप तंत्र के लिए बड़े एक्सचेन्ज द्वारा प्रदान की गई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे एक तरफ कॉस्ट‑ऑफ़‑ऑपरेशन घटेगा, लेकिन दूसरी ओर एक्सचेंजों पर प्रणालीगत जोखिम का बोझ बढ़ सकता है, अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर तकनीकी विफलता आती है।

नियामकीय संदर्भ में, सेबी ने इस कदम को “उपभोक्ता संरक्षण के व्यापक ढांचे के भीतर” कहा, और सभी एक्सचेंजों को उनके आपदा‑प्रबंधन प्रोटोकॉल को और अधिक सुदृढ़ करने का आदेश दिया। इस दिशा में सेबी ने नई सुरक्षा मानकों, न्यूनतम डेटाबेस रेजिलिएन्स, और रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग टूल्स को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। आलोचक तर्क देते हैं कि IRRA को अचानक समाप्त करना निवेशकों को कम-जोखिम विकल्पों से वंचित कर सकता है, विशेषकर उन निवेशकों के लिए जो अत्यधिक अस्थिरता के दौरान जोखिम को सीमित रखना चाहते हैं।

वित्तीय महत्व के परिप्रेक्ष्य में, IRRA का उद्देश्य बाजार व्यवधान के समय निवेशकों के पोर्टफोलियो को “सुरक्षित कवरेज” देना था, जिसका अनुमान लगाकर सेबी ने शुरुआती चरण में कुछ सौ करोड़ रुपये के संभावित नुकसान को रोका था। अब इस कवरेज को हटाने से वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव की भविष्यवाणी करना कठिन है; यह या तो बाजार की प्रतिरक्षा क्षमता को दर्शाएगा या फिर वैकल्पिक जोखिम‑प्रबंधन साधनों की आवश्यकता को उजागर करेगा।

सार्वजनिक परिणाम के तौर पर, निवेशकों को अब व्यापक आपदा‑प्रबंधन ढांचे के तहत बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, पर उन्हें यह समझना आवश्यक है कि जोखिम‑न्यूनतम ट्रेडिंग विकल्प अब केवल एक्सचेंज‑स्तर के बैक‑अप सिस्टम तक सीमित रहेंगे। उपभोक्ता जागरूकता और ब्रोकरेज कंपनियों की पारदर्शी रिपोर्टिंग इस संक्रमण काल में निर्णायक भूमिका निभाने की संभावना है।

Published: May 7, 2026