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स्त्रियों की बचत में भरोसा, पर आधे से अधिक निधि कम आय वाले साधनों में जमा
एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय महिलाओं में बचत के प्रति आत्मविश्वास अपेक्षाकृत अधिक है, पर लगभग पांच में से दो अपने गैर‑सेवानिवृत्ति पूँजी को कम रिटर्न वाले बचत खातों या हाथ में नकदी में रखती हैं। इससे लंबी अवधि में मुद्रास्फीति के असर को मात देना कठिन हो रहा है।
सर्वे में बताया गया कि 48% महिलाएं अपनी बचत का अधिकांश भाग बैंक के साधारण बचत खाता, पोस्ट ऑफिस बचत या घर में रखी हुई नकदी में रखती हैं। इन साधनों पर वार्षिक वास्तविक रिटर्न अक्सर 3‑4% से नीचे रहता है, जबकि इस वर्ष की अनुमानित महंगाई दर 6‑7% के आसपास है। परिणामस्वरूप, वास्तविक खरीदी शक्ति में कमी का जोखिम बढ़ रहा है।
उपभोक्ता वित्तीय तंत्र में इस प्रवृत्ति के कई आर्थिक निहितार्थ हैं। पहला, कम रिटर्न वाले पोर्टफ़ोलियो से घरेलू निवेश का उत्पादन‑उन्मुख क्षेत्र, जैसे इक्विटी, म्यूचुअल फ़ंड या बॉण्ड, में प्रवाह सीमित रहता है, जिससे पूँजी बाजार की गहराई और तरलता पर असर पड़ता है। दूसरा, महिला उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़ता है, विशेषकर आय असमानता और अनियमित आय स्रोतों के संदर्भ में।
वित्तीय नियामक – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) – ने हालिया वर्षों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल भुगतान, क्यूरेटेड एसेट मैनेजमेंट और महिलाओं के लिए विशेष बचत योजनाओं की घोषणा की है। परन्तु इन पहलों का वास्तविक प्रभाव मूल्यांकन अभी शुरूआती चरण में है। अधिकांश महिला बचतकर्ताओं के पास अभी भी पारंपरिक बैंकिंग सुविधाओं तक सीमित पहुंच है, या वे जोखिम के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखतीं, जिससे वे उच्च रिटर्न वाले वैकल्पिक उत्पादों से दूर रहती हैं।
नीति‑निर्माताओं को इस अंतर को पाटने के लिए दो‑तीन कदम उठाने की आवश्यकता है। एक, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को महिलाओं के दैनिक जीवन के साथ जोड़कर, बॉण्ड, म्यूचुअल फंड या पेंशन स्कीम जैसे उत्पादों के लाभों को स्पष्ट करना चाहिए। दो, नियामक स्तर पर ऐसे प्रोत्साहन तंत्र विकसित करना चाहिए जो कम‑अवधि में उच्च रिटर्न वाले सुरक्षित उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाए, साथ ही निवेश पर उपभोक्ता संरक्षण के मानकों को सुदृढ़ करे। तीन, डिजिटल वित्तीय सेवाओं के कवरेज को विस्तारित करके ग्रामीण और अर्द्ध‑शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सस्ती, पारदर्शी और जोखिम‑समायोजित निवेश विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए।
जब तक इन उपायों को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जाता, तब तक महिला बचतकर्ता मुद्रास्फीति के दबाव से बचने के लिए पर्याप्त रिटर्न नहीं कमा पाएँगी, और राष्ट्रीय स्तर पर पूँजी बाजारों की गहराई एवं स्थिरता भी सीमित रहेगी। इस संदर्भ में वित्तीय संस्थानों, नियामकों और नीति-निर्माताओं को मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करना अनिवार्य है, जहाँ महिलाओं की बचत आत्मविश्वास के साथ-साथ आर्थिक दृढ़ता भी प्रदान कर सके।
Published: May 9, 2026