स्टेट स्ट्रीट के CEO ने कहा ETFs का बाजार 'विस्फोट' कर गया
बेलव्यू में मिल्केन इंस्टीट्यूट ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में स्टेट स्ट्रीट के चेयरमैन और सीईओ रॉन ओ'हैनली ने कहा कि एक्सचेंज‑ट्रेडेड फंड (ETFs) का विकास हाल के वर्षों में ‘विस्फोट’ की तरह बढ़ा है। उन्होंने इस प्रवृत्ति को ‘एपिसोडिक’ विलय‑और‑अधिग्रहण (M&A) के साथ जोड़ते हुए बताया कि बाजार में अवसरों का विस्तार हो रहा है, पर साथ ही भू‑राजनीतिक जोखिमों ने नई अनिश्चितताएँ पेश की हैं।
वैश्विक रूप से ETFs की परिसंपत्ति प्रबंधन (AUM) लगभग 12 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गई है, जिससे पारंपरिक म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी घट रही है। भारत में भी इस प्रवृत्ति का असर स्पष्ट हो रहा है। सेबी ने पिछले दो वर्षों में ETF पंजीकरण में 45 % की बढ़ोतरी देखी है, जबकि निवेशकों की भागीदारी में समान गति से वृद्धि हुई है। इस संदर्भ में, स्टेट स्ट्रीट जैसे अंतरराष्ट्रीय एसेट मैनेजर्स का भारतीय बाजार में प्रवेश नई प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार ले कर आ सकता है, पर इसके साथ संभावित जोखिम भी बढ़ते हैं।
ओ'हैनली ने कहा कि M&A गतिविधियाँ अभी ‘एपिसोडिक’ स्वरूप में हैं, यानी बाजार के अस्थायी उतार‑चढ़ाव के दौरान ही संधियों पर काम किया जा रहा है। भारतीय वित्तीय नियामकों के लिए यह संकेत है कि बड़ी फर्मों का स्थानीय बाजार में विलय‑अधिग्रहण रणनीति को बार‑बार निगरानी और नियामक मंजूरी की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना आवश्यक है। SEBI ने हाल ही में ETF के लिस्टिंग और ट्रस्ट संरचना पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फंड हाउसों की जटिल संरचनाओं को समझने के लिए और अधिक विशिष्ट नियमों की जरूरत पड़ सकती है।
भू‑राजनीतिक जोखिमों की बात करते हुए, ओ'हैनली ने उल्लेख किया कि यूरोप‑एशिया में बढ़ती तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार‑चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ETFs की नेट सक्रियता (NAV) को अस्थिर कर सकते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह चेतावनी महत्व रखती है, क्योंकि भारतीय स्टॉक्स, बॉण्ड और कमोडिटी में बास्केटेड ETFs का विस्तार हो रहा है। ऐसी अस्थिरता को सीमित करने हेतु, RBI और SEBI को बाजार में तरलता प्रबंधन और स्टॉप‑लॉस तंत्र को सख्ती से लागू करना चाहिए।
इसी बीच, स्टेट स्ट्रीट ने कहा कि वह अपनी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग क्षमताओं को भारतीय साझेदारियों के माध्यम से भारत में लाने की योजना बना रहा है। अगर यह पहल सफल होती है तो भारतीय रिटेल एवं संस्थागत निवेशकों को कम शुल्क, तेज़ निष्पादन और व्यापक उत्पाद चयन का लाभ मिल सकता है। परंतु इस प्रक्रिया में डेटा सुरक्षा, नियामक अनुपालन और निवेशक शिक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, ताकि ‘विस्फोट’ के साथ जुड़ी संभावित अंधाधुंध जोखिमों को टाला जा सके।
समग्र रूप में, ETFs का तेज़ विकास भारतीय वित्तीय बाजार को कई नए अवसर प्रदान कर रहा है, पर साथ ही नियामक ढाँचे में लचीलापन, जोखिम प्रबंधन और उपभोक्ता संरक्षण के मानकों को मजबूत करने की ज़रूरत भी बढ़ा रहा है। स्टेट स्ट्रीट के सीईओ ने इस संतुलन पर ज़ोर देते हुए कहा कि ‘विस्फोट’ को नियंत्रित करने की कुंजी निवेशकों को सुदृढ़ जानकारी और पारदर्शी उत्पादों के माध्यम से सक्षम बनाना है।
Published: May 5, 2026