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शेल के सीईओ ने कहा, इरान‑इज़राइल संघर्ष से विश्व तेल बाज़ार में 1 अरब बैरल की कमी, अंतर हर दिन बढ़ रहा है
शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने 7 मई को एक इंटरव्यू में बताया कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद रहने और इरान‑इज़राइल के बीच चल रहे सैन्य टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में लगभग 1 अरब बैरल की शॉर्टतापी (अभाव) है। यह अंतर प्रतिदिन बढ़ रहा है और बाजार में अस्थिरता को तेज़ी से बढ़ा रहा है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, पिछले दो हफ्तों से बंद है। इस बंदी के परिणामस्वरूप मध्य‑पूर्वी तेल निर्यात की आपूर्ति श्रृंखला में विक्षेप उत्पन्न हुआ है। शेल के सीईओ का मानना है कि जब तक अमेरिकी‑इरानी वार्ता सफल नहीं होती, इस शॉर्टफिल को पाटना मुश्किल रहेगा।
भारत के लिए यह विकास दोहरी चुनौती पेश करता है। सबसे पहले, भारत की पेट्रोलियम आयात की 70 % से अधिक मात्रा मध्य‑पूर्व से आती है, जहाँ से अधिकांश कच्चा तेल हॉर्मुज़ के माध्यम से भारत के बंदरगाहों तक पहुँचता है। बंदी के कारण आयात लागत में वृद्धि और डिलीवरी में देरी होने की संभावना है। दूसरा, भारत सरकार ने हाल ही में पेट्रोल, डीजल और एथेनॉल‑मिश्रित पेट्रोल की कीमतों में स्थिरता की आश्वस्ति दी है, परंतु अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में निरंतर धक्कों के कारण उपभोक्ताओं को महंगाई का बोझ झेलना पड़ रहा है।
विनियामक और नीति‑परिप्रेक्ष्य में कई मुद्दे उभरे हैं। ओपेक+ के समायोजन के बावजूद, बाजार में पर्याप्त तरलता नहीं बन पाई है। भारतीय ऊर्जा मंत्रालय को अब दूरस्थ आपूर्ति विकल्पों, जैसे अफ्रीका और अमेरिका के शेल्फ‑लाइट तेल, को तेज़ी से अपनाने की जरूरत है, साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (एसपीआर) को सक्रिय करने की योजना को स्पष्ट करना चाहिए। इसके अलावा, शेल जैसे बहुराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों की कॉरपोरेट जवाबदेही पर सवाल उठ रहा है—क्या वे अस्थिरता के दौर में उचित मूल्य निर्धारण और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं?
उपभोक्ताओं पर प्रभाव स्पष्ट है। ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य व सामान की कीमतें भी प्रभावित होंगी। इससे मौजूदा महंगाई का दबाव और बढ़ेगा, विशेषकर मझोले वर्ग के घरों पर। वित्तीय बाजारों में तेल की कीमतों के अस्थिरता के कारण शेयरों और बांडों की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे निवेशकों को जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ेगी।
निपटारा अभी दूर प्रतीत होता है, और शेल के सीईओ ने संकेत दिया कि अंतर हर दिन गहरा होता जा रहा है। इस संदर्भ में, नीति निर्माताओं, नियामकों और बड़े ऊर्जा निगमों को मिलकर एक समन्वित रणनीति तैयार करनी होगी—जैसे वैकल्पिक शिपिंग मार्गों का विकास, रणनीतिक भंडारण का सुदृढ़ीकरण, और मध्य‑पूर्वी भू‑राजनीतिक तनाव के कारण उत्पन्न जोखिमों को कम करने हेतु वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश। तभी भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की रक्षा संभव होगी।
Published: May 8, 2026