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वॉरेन सहित सिनेटरों ने एक्सपेरियन, इक्विफैक्स से बाय‑नाउ‑पे‑लेटर डेटा उपयोग पर सवाल किए
संयुक्त राज्य के कांग्रेस के एक समूह, जिसमें एलेनन वॉरेन सिनेटर प्रमुखता से शामिल हैं, ने प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो एक्सपेरियन और इक्विफैक्स को बाय‑नाउ‑पे‑लेटर (BNPL) ऋण जानकारी को उपभोक्ता क्रेडिट रिपोर्ट में शामिल करने की प्रथा पर कठोर सवाल उठाए। यह पूछताछ इस बात को स्पष्ट करने के लिए थी कि ये संस्थाएँ किस प्रकार और किन मानकों के तहत नए वित्तीय उत्पादों से उत्पन्न डेटा को स्कोरिंग मॉडल में सम्मिलित कर रही हैं।
BNPL सेवाएँ, जो उपभोक्ताओं को तुरंत खरीदारी करने और भुगतान को कई किस्तों में बाँटने का विकल्प देती हैं, पिछले दो वर्षों में भारत सहित कई उभरते बाजारों में तेज़ी से लोकप्रिय हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक विश्व BNPL बाजार का आकार 300 बिलियन डॉलर से पार कर सकता है, जबकि भारतीय बाजार में उसी अवधि में 30‑40 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इस तिव्र विस्तार ने ऋणदाता और उपभोक्ता दोनों के लिए नई जोखिमों को जन्म दिया है, क्योंकि कई उपयोगकर्ता बिना स्पष्ट ब्याज या देर से भुगतान जुर्माने की जानकारी के कई खाते खोल लेते हैं।
सिनेटरों ने बताया कि यदि BNBL डेटा को पारंपरिक क्रेडिट हिस्ट्री के साथ मिलाकर स्कोरिंग में शामिल किया जाए, तो यह उपभोक्ताओं के डिफ़ॉल्ट जोखिम को बढ़ा सकता है, जिससे ऋण तक पहुँच सीमित हो सकती है। विशेष रूप से, उन वर्गों में जहाँ वित्तीय साक्षरता अभी भी सीमित है, अनपेक्षित स्कोर गिरावट से माइक्रो‑फाइनेंस, गृह ऋण और यहां तक कि रोजगार के अवसर पर भी असर पड़ सकता है।
वित्तीय नियामक निकाय, जैसे कि फेडरल रिज़र्व और उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो (CFPB), ने पहले भी BNPL सेक्टर पर कठोर नज़र रखी है, परन्तु क्रेडिट ब्यूरो द्वारा इस डेटा को कैसे प्रोसेस किया जा रहा है, इस पर स्पष्ट दिशा‑निर्देश अभी तक जारी नहीं हुए हैं। इस संदर्भ में सिनेटरों की पूछताछ नियामक ढांचे की कमी को उजागर करती है और इस बात की मांग करती है कि डेटा संग्रह, सत्यापन और उपयोग के मानकों को पारदर्शी रूप से स्थापित किया जाए।
क्रेडिट ब्यूरो प्रतिवाद में यह बताते हैं कि BNPL डेटा को शामिल करने से रिपोर्ट अधिक सम्पूर्ण हो जाती है और ऋणदाता को वास्तविक भुगतान व्यवहार का स्पष्ट संकेत मिलता है। परन्तु आलोचकों का कहना है कि इन कंपनियों ने अभी तक इस डेटा की गुणवत्ता, समयसीमा और संभावित त्रुटियों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी है, जिससे गलत रिपोर्टिंग की संभावना बढ़ती है।
उपभोक्ता समूह इस बात पर बल दे रहे हैं कि बिना स्पष्ट सहमति के BNPL लेन‑देन को स्कोरिंग मॉडल में मिलाया जाना व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और वित्तीय अत्याचार की चिंताओं को बढ़ाता है। साथ ही, यदि इस डेटा के आधार पर ऋण पात्रता में कटौती की जाती है, तो यह आर्थिक समावेशन के लक्ष्य के विरुद्ध जाता है, विशेषकर भारत जैसे विकासशील बाजार में जहाँ युवा और मध्यम वर्ग के उपभोक्ता BNPL को अपनी खरीद शक्ति बढ़ाने का साधन मानते हैं।
आगे की प्रक्रिया में, कांग्रेस का ये कार्य स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में नियामक प्रवर्तन को सुदृढ़ कर सकता है। यदि नीति निर्माताओं ने उपभोक्ता संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट मापदंड तय किए, तो BNPL के फायदों को जोखिम‑प्रबंधन के साथ संतुलित करने की संभावना बनी रहेगी। इस बीच, क्रेडिट ब्यूरो को उपभोक्ता को सूचित करने, डेटा संग्रह में त्रुटियों को कम करने और संभावित स्कोर परिवर्तन की पूर्व-सूचना देने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपेक्षा है।
Published: May 7, 2026