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वियना की सार्वजनिक परिवहन की प्रशंसा, लेकिन कार निर्भरता को कैसे खत्म किया जाए?

ऑस्ट्रियाई राजधानी वियना की ट्रेन, ट्राम और बस प्रणाली को अक्सर यूरोप के सबसे विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन नेटवर्कों में गिना जाता है। वार्षिक उपयोग डेटा के अनुसार, शहर के कुल यात्राओं में से लगभग 75 % सार्वजनिक माध्यमों द्वारा पूरी होती हैं, जबकि निजी कारें अभी भी एक चौथाई यात्राओं का हिस्सा हैं। यह अनुपात यूरोप में कार‑निर्भरता को घटाने के लक्ष्य के सामने एक चुनौती प्रस्तुत करता है, और भारतीय महानगरों के परिवहन नीति निर्माताओं के लिये एक तुलनात्मक केस बनता है।

वियना के पूर्व जलवायु व परिवहन मंत्री लियोनोर गेवेस्लर के अनुसार, कुशल सार्वजनिक परिवहन ही नागरिकों के यात्रा‑संकल्प को बदलने का मूलभूत प्रावधान है। इस विचारधारा के तहत शहर ने नई ट्राम लाइनों का विस्तार तथा ‘पार्क‑एंड‑राइड’ (P&R) सुविधाओं के विकास की योजना बनाई है। प्रस्तावित P&R पार्कों में वाहन स्वामी अपने कार को शहर के परिधि पर छोड़कर, सीधे ट्राम या मेट्रो पर सवार होकर कार्यस्थल या शॉपिंग केंद्र तक पहुँचेंगे। इस मॉडल से न केवल भीड़भाड़ घटेगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।

भारत में समान समस्याएँ अधिक जटिल रूप से उभरी हैं। दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में निजी कारों का हिस्सा 45‑55 % तक पहुँच गया है, जिससे रोड‑डेज़, औसत यात्रा समय में वृद्धि, और वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। सार्वजनिक परिवहन का बुनियादी ढाँचा अक्सर असंतुलित, अधूरा या वित्तीय तंगी के कारण रख‑रखाव में पीछे रहता है। इस पृष्ठभूमि में वियना से सीखने लायक दो प्रमुख बिंदु उभरते हैं: (1) निरंतर सार्वजनिक निवेश और पारदर्शी प्रबंधन द्वारा सेवा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, और (2) निजी वाहन उपयोग को हतोत्साहित करने हेतु संरचनात्मक उपाय, जैसे P&R, सिटी‑सेन्टर चार्जिंग, और पार्किंग शुल्क।

वियना की योजना में प्रमुख आर्थिक प्रभाव भी नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते। ट्राम नेटवर्क का विस्तार लगभग €1.2 बिलियन (लगभग ₹12 हजार करोड़) की लागत में किया जा रहा है, जिसका वित्तपोषण सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल और यूरोपीय संघ के हरित बुनियादी ढाँचा फंड से होता है। इस निवेश से निर्माण‑संबंधी रोजगार में 5 % की वृद्धि की आशा है, साथ ही दीर्घकालिक रूप से वाहन चलाने के औसत लागत में 15‑20 % की कमी आ सकती है। भारतीय शहरों में समान परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पूँजी की आवश्यकता होगी, परंतु मौजूदा नियामकीय ढांचा अक्सर जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण अनुमतियों और आयात‑टैक्स पर प्रतिबंधों के कारण बाधित रहता है।

एक स्वरूपित आलोचना यह भी आवश्यक है कि नियामक प्रवर्तन में अक्सर ढील दिखाई देती है। वियना में ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और स्वचालित कैमरा निगरानी के ज़रिए अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है, जबकि भारत में कई महानगरों में सख्त फाइन और डिटेक्शन सिस्टम की कमी से नियम‑उल्लंघन जारी रहता है। इससे सार्वजनिक परिवहन के लिए पर्याप्त राजस्व नहीं जुट पाता, जिससे फ्री बाय‑डिस्काउंट या सब्सिडी देना कठिन हो जाता है।

उपभोक्ता दृष्टिकोण से भी विश्लेषण आवश्यक है। वियना के यात्रियों को टिकेट की कीमतें सस्ती और संरचित मिलती हैं—एक स्टैंडर्ड ट्राम टिकट लगभग €2.40 (₹200) है, और मासिक पास में 30 % की छूट दी जाती है। यह कीमत‑संरचना निजी कार मालिकों की कुल यात्रा लागत (ईंधन, रख‑रखाव, पार्किंग) से कम होने के कारण सार्वजनिक विकल्प को आकर्षक बनाती है। भारतीय उपभोक्ताओं के बीच समान मूल्य‑विन्यास को लागू करने के लिये, मेट्रो और बस नेटवर्क में किराया सब्सिडी के साथ साथ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर रीयल‑टाइम एग्ज़ैक्ट कैप्चरिंग की सुविधा देना आवश्यक होगा।

कुल मिलाकर, वियना का मॉडल दर्शाता है कि दीर्घकालिक सार्वजनिक निवेश, स्पष्ट नियामकीय सख्ती, और उपभोक्ता‑केंद्रित मूल्य निर्धारण को जोड़कर ही निजी वाहन उपयोग को घटाया जा सकता है। भारतीय शहरी योजना में इन तत्वों को अपनाने से न केवल ट्रैफ़िक जाम कम होगा, बल्कि उत्पादन‑संबंधी अवसरों की वृद्धि, ऊर्जा खपत में कमी, और हरित आर्थिक लक्ष्य की पूर्ति संभव होगी। हालांकि, इसके लिये सरकारी बजट में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना, पर्यावरण‑मित्र नियामक फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, और निजी‑सार्वजनिक साझेदारी में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक है। यह तभी संभव होगा जब नीति‑निर्माता, निर्माण कंपनियां, ऑटो‑सेक्टर और उपभोक्ता सभी मिलकर दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएँ और अल्पकालिक वाहन‑रहित लाभों से परे सामाजिक‑आर्थिक निर्माण को लक्ष्य बनायें।

Published: May 7, 2026