रूपी ने USD के सामने 95.40 पर नई रिकॉर्ड लो छू ली, मध्य‑पूर्व तनाव और तेल की कीमतों ने दबाव बढ़ाया
भारत का राष्ट्रीय मुद्रा, रूपी, मंगलवार को 95.40 प्रति अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक न्यूनतम दर पर ट्रेड हुआ, जिससे पिछले महीनों की निरंतर गिरावट का सिलसिला जारी रहा। इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव, विशेषकर मध्य‑पूर्व क्षेत्र में, और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल माना जा रहा है।
उच्च तेल कीमतों से आयात‑निर्भर भारत की ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी हुई, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग तेज हुई। साथ ही, वैश्विक जोखिम भावना के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी और ऋण बाजारों से निकासी बढ़ा दी, जिससे विदेशी पूँजी प्रवाह में उल्लेखनीय गिरावट आई। इन दोनों कारकों ने रूपी पर दोहरा दबाव डाला।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने पिछले दो हफ्तों में कई बार अप्रत्यक्ष बाजार हस्तक्षेप किया, लेकिन वर्तमान मौद्रिक नीति का दायरा सीमित है। मौद्रिक वृद्धि वृष्टि को टेम्पर करने के लिए RBI ने मौजूदा रिवर्स रेपो दर को 5.15% पर बरकरार रखा और खुले बाजार में बंधन खरीदे, परन्तु इन कदमों से दीर्घकालिक सस्ती दर की गारंटी नहीं मिल पाई।
रूची प्रवाह में गिरावट और निर्यात‑आधारित कंपनियों की आय में कमी के साथ, प्रमुख सूचकांक जैसे सेंसेक्स और निफ्टी ने भी नीचे की ओर रुझान दिखाया। इस माह के अंत तक, अनुमानित औसत शेयर कीमत में लगभग 2% की गिरावट हो सकती है, जो निवेशकों के जोखिम प्रीमियम को आगे बढ़ाएगी।
उच्च तेल मूल्यों के कारण हुए आयात‑बिल पर असर से उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से महंगाई का झटका महसूस होगा। मूल्य सूचकांक में मौजूदा माह के भीतर 0.6‑0.8% की अतिरिक्त उछाल की संभावना है, जिससे विशेषकर ऊर्जा‑संबंधित वस्तुओं की लागत में वृद्धि होगी। इस परिस्थितियों में, सरकार की मौजूदा सब्सिडी व राहत योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठते हैं, क्योंकि दूसरी ओर यह योजनाएँ बजट घाटे को बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अल्पकालिक दर हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं है। स्थायी समाधान के लिए आयात‑निर्भरता को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने और बाहरी पूँजी आकर्षित करने हेतु नियामकीय ढाँचे में सुधार अनिवार्य है। साथ ही, वर्तमान मौद्रिक नीति को धीरे‑धीरे सामान्यीकरण की दिशा में ले जाना, जिससे रूपी के लिए दीर्घकालिक समर्थन बन सके।
अतः, रिकॉर्ड लो के बावजूद, रूपी को स्थिर करने हेतु नीतिगत दृढ़ता, संरचनात्मक सुधार और मौद्रिक टूल्स के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
Published: May 5, 2026