रूट 66 के शताब्दी पर विदेशी यात्रियों से मिलने वाला आर्थिक उछाल: भारत के पर्यटन‑बिज़नेस के लिए सबक
अमेरिका के प्राचीन "मदर रोड" रूट 66 ने इस वर्ष अपनी शताब्दी पूरी की। ट्रम्प प्रशासन के बाद भी इस ऐतिहासिक महामार्ग पर विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। यू.एस. सेंटर फॉर टूरिज़्म के आंकड़े बतलाते हैं कि 2025‑26 में रूट 66 के आसपास के शहरों ने 2.3 मिलियन अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित किया, जिससे स्थानीय आवास, रेस्टोरेंट और गैस स्टेशन जैसी लघु‑उद्यम इकाइयों की आय में औसत 12 % की वार्षिक वृद्धि हुई।
ऐसे राजसी पर्यटन प्रवाह के पीछे कई आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। पहले, अमेरिकी वैज़ा नीतियों में हालिया नरमी ने यू‑रॉड के पार यात्रा को सस्ता और सुगम बना दिया। दूसरा, निजी‑सार्वजनिक साझेदारी के तहत रूट 66 के रख‑रखाव और मार्केटिंग में फेडरल फंड के अतिरिक्त 150 मिलियन डॉलर्स का निवेश किया गया, जिससे सड़कों की हालत में उल्लेखनीय सुधार और नई साइनज एवं डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित हुई। इन बुनियादी ढाँचे में हुई तेजी ने यात्रा समय को 15 % तक घटाया, जिससे यात्रियों की खर्च क्षमता बढ़ी।
हालाँक़ि, इस विकास मॉडल में कुछ नियामक असंगतियां भी उजागर हुई हैं। कई छोटे व्यवसायों ने यह बताया कि कर छूट और स्थानिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया में असमानता के कारण वे बड़े टूर ऑपरेटरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, पर्यावरणीय स्थिरता के मुद्दे को लेकर संघीय एजेंसियों से स्पष्ट दिशा‑निर्देशों की कमी पर प्रश्न उठे हैं, जबकि रूट 66 की धूम्र‑धूम्रता ने स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
इन चुनौतियों को देखते हुए भारतीय नीति‑निर्माताओं के लिये कुछ स्पष्ट सबक उभरते हैं। भारत में ग्रेट ट्रंक रोड, समुद्र तट के किनारे की ऐतिहासिक राजमार्गें और कई राज्य‑स्तरीय पर्यटन सर्किट मौजूदा हैं, परन्तु इनके आर्थिक लाभ को अधिकतम करने के लिये समान सार्वजनिक‑निजी निवेश मॉडल, स्पष्ट कर‑राहत एवं पर्यावरण मानकों का एकीकृत ढांचा आवश्यक है। इसके साथ ही, छोटे उद्यमियों को डिजिटल बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म और ब्रांड सहयोग के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों तक पहुँच बनाने में मदद मिलनी चाहिए, जिससे रोजगार‑सृजन और आय‑वृद्धि का द्विपक्षीय प्रभाव साकार हो सके।
संक्षेप में, रूट 66 का शताब्दी उत्सव न केवल अमेरिकी इतिहास की स्मृति को ताज़ा करता है, बल्कि पर्यटन‑आधारित स्थानीय आर्थिक विकास के एक प्रमुख प्रयोगशाला के रूप में अपनी भूमिका पुनः स्थापित करता है। भारत अगर इन अनुभवों को अपनी विरासत‑मार्गों पर लागू करे, तो विदेशी यात्रियों के बढ़ते प्रवाह को सतत, लाभदायक और उपभोक्ता‑हितैषी बनाते हुए व्यापक आर्थिक प्रभाव साकार किया जा सकता है।
Published: May 4, 2026