यूके में घर खरीदारों को दो दशक में सबसे कम बंधक सुलभता, भारत की आवासीय वित्तीय स्थिति पर प्रश्न उठते हैं
वित्तीय संस्था यूके फ़ाइनेंस के हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के घर खरीदारों को अब दो दशकों में सबसे कम बंधक सुलभता का सामना करना पड़ रहा है। औसत तौर पर, प्रारंभिक बंधक किस्तें घर खरीदारों की सकल आय का 21.3 % खा रही हैं, जो 2008 के बाद से सबसे उच्च स्तर है। यह आंकड़ा न केवल उपभोक्ता खर्च की गुंजाइश को घटाता है, बल्कि आवासीय बाजार की स्थिरता पर भी खतरा उत्पन्न करता है।
भौगोलिक रूप से असमानता स्पष्ट है; लंदन के कम्यूटिंग बेल्ट के आसपास के क्षेत्रों में बंधक सुलभता सबसे कम दर्ज की गई है, जबकि उत्तर के कुछ शहरी केंद्रों में स्थितियों में सुधार दिख रहा है। इस अंतर का कारण उच्च संपत्ति मूल्य, सीमित नई आपूर्ति और क्षेत्रीय वेतन वृद्धि का असंगत होना माना जा रहा है। साथ ही, इरान के साथ वृद्धि होते तनाव को अभी तक इस डेटा में प्रतिबिंबित नहीं किया गया है, जिससे भविष्य में जोखिम प्रीमियम में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
भारत की स्थिति से तुलना करते हुए देखा जाए तो हमारे गृह ऋण बाजार में भी समान दबाव उभर रहा है। रिटेल बंधक दरें लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, और कई ग्राहकों के लिए ऋण किस्तें आय का 20 % से अधिक भाग ले रही हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में ऋण‑से‑आय अनुपात (DTI) सीमा को 50 % तक घटाने की सिफारिश की है, लेकिन इस दिशा‑निर्देश का पालन बैंक द्वारा पूर्णतः नहीं हो रहा है। कई बड़े बैंकों ने लाभ के लिये उच्च‑जोखिम वाले ख़रीदारों को ऋण जारी किए हैं, जिससे एग्ज़िट लैटिसी और डिफॉल्ट जोखिम में वृद्धि हो सकती है।
बाजार नियामकों को दो प्रमुख प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा: प्रथम, बंधक‑वित्तीय उत्पादों की उचित रूप‑रेखा तय करने हेतु अधिक सख्त जोखिम प्रबंधन मानकों को लागू करना; द्वितीय, आवासीय आपूर्ति को बढ़ाने के लिये नीतिगत प्रोत्साहन—जैसे कि भूमि‑परिवहन कर में छूट, अनिर्धारित घर निर्माण निधि—पर शीघ्रता से कार्य करना। उपभोक्ता बचत पर दबाव बढ़ने से अभी के आर्थिक पुनरुद्धार को उल्टा असर हो सकता है, विशेषकर जब किराए के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
सारांशतः, यूके में बंधक सुलभता के गिरावट का संकेत वैश्विक स्तर पर रहने वाले मकान‑उधारकों की वित्तीय झिलमिलाहट को उजागर करता है। भारतीय नीति निर्माताओं को इस प्रवृत्ति को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए; ऋण‑से‑आय अनुपात की निगरानी, बैंकों की लोन‑ऑफ़‑डेट (LOD) अनुपात को सुदृढ़ करना और सस्ती आवास के लिए सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अधिक सक्रिय बनाना आवश्यक है। तभी घर खरीदारों के बंधक बोझ को नियंत्रित कर आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकेगा।
Published: May 6, 2026