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Category: व्यापार

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मध्यपूर्व तनाव के हल्के होने से सोने की कीमत एक हफ्ते के शिखर के करीब

विश्व स्तर पर मध्यपूर्व के तणाव में सहजता आई, जिससे आज भारतीय बाजार में सोने की कीमतें एक हफ्ते के उच्चतम स्तर तक पहुँच गईं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संकेतित मौद्रिक नीति में स्थिरता, और डॉलर्स पर उभरी हुई दबाव इस कीमत में वृद्धि के मुख्य कारणों में से हैं।

जुलाई 2026 में सोने की कीमतें 62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुँच गईं, जबकि इसी अवधि में चाँदी की कीमत 1,020 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रही। दोनों धातुओं की कीमतों में यह उछाल वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित आश्रय के रूप में सोने को चुनने की प्रवृत्ति को दर्शाता है, विशेषकर जब भू‑राजनीतिक अनिश्चितता घटती है।

भारतीय उपभोक्ता इस मूल्य वृद्धि को दो पहलुओं से देख रहे हैं। एक ओर, घरों में सोने की भंडारण को सुरक्षित मानते हुए रिटेल खरीद में बढ़ोतरी की संभावना है; दूसरी ओर, उच्च कीमतें विस्तृत वर्ग के मध्य‑वर्गीय खरीदारों की पहुँच से बाहर हो सकती हैं, जिससे असमानता का जोखिम बढ़ता है। रिटेल बाजार में सोने के डिब्बे, सिक्के और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड (E‑Gold) प्लेटफ़ॉर्म की मांग में स्पष्ट वृद्धि दर्ज हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने हाल ही में आयात शुल्क में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन वैट (GST) एवं शिल्प कारीगरों को मिलने वाले लाभप्रद दायरे को लेकर चर्चा जारी है। औसत सिस्टमिक जोखिम को देखते हुए, नियामक निकायों को निर्यात‑आधारित सोने की खरीद को नियंत्रित करने तथा सट्टा ट्रेडिंग पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि बाजार में अत्यधिक उछाल रोक सके।

वित्तीय बाजार में इस मूल्य उतार‑चढ़ाव का प्रभाव मात्र धातु कीमतों तक सीमित नहीं है। सोने की कीमत में बढ़ोतरी भारतीय रुपये के मूल्य को स्थिर रखने में मदद करती है, जिससे आयात‑आधारित महंगाई में कुछ राहत मिलती है। हालांकि, यदि इस अवधि में डॉलरों की मजबूती फिर से बढ़ी, तो सोने की कीमतें और भी उच्च स्तर पर स्थापित हो सकती हैं, जिससे भारत की मौद्रिक नीति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यपूर्व में तनाव का हल्का होना अस्थायी राहत हो सकती है; इसलिए निवेशकों को अल्पकालिक लाभ की तलाश में असावधानीपूर्वक सट्टा लेन‑देन से बचना चाहिए। दीर्घकालिक दृष्टि में सोने को पोर्टफ़ोलियो में जोखिम‑हैजिंग के साधन के रूप में देखना अधिक उचित रहेगा, जबकि नियामक निकायों को उपभोक्ता सुरक्षा के साथ साथ बाजार की पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करना चाहिए।

Published: May 7, 2026