मोदी के सुधार और मजबूत बफ़र के साथ भारत ने इमरजिंग मार्केट में स्थायित्व का दर्जा प्राप्त किया
एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेटिंग संस्था के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, भारत ने 2020 के बाद से अपनी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखते हुए इमरजिंग‑मार्केट में शीर्षस्थ बड़े देशों में जगह बनायी है। इस क्रम में सोवरिन बांड स्प्रेड, घरेलू बॉन्ड यील्ड और विनिमय दर की स्थिरता जैसे कई संकेतकों को ध्यान में रखा गया है।
ऐसे परिणाम मुख्यतः दो स्तंभों पर निर्भर करते हैं: नीति‑सुधार और वित्तीय बफ़र। पिछले वर्षों में लागू किए गये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के व्यापकीकरण, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन, और बैंकिंग सेक्टर के सुदृढ़ीकरण ने जोखिम को कम किया है। साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार का 600 अरब डॉलर से अधिक स्तर, साथ ही प्रॉविडेंट फंड और राजकोषीय रिज़र्व में संचित अतिरिक्त शक्ति ने संभावित वैश्विक शॉक को सहना आसान बना दिया है।
इन कदमों की वजह से भारतीय रुपये की तुलना में कई प्रतियोगी मुद्राओं के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर बना है, जबकि घरेलू ब्याज दरें निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सहायता कर रही हैं। इससे विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार और रीटेल व संस्थागत निवेश दोनों में वृद्धि देखी गई है।
हालाँकि, मौद्रिक नीति की लचीलापन और नियामक ढाँचे में थोड़ा ढीलापन भी चिंता का विषय बना हुआ है। व्याज दरों के निरंतर समायोजन और ऋण‑संकट से बचाव के लिए बैंकों में गैर‑प्रदर्शनकारी संपत्तियों (NPAs) को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका है। साथ ही, इन्वेस्टमेंट‑टु‑GDP अनुपात को उच्च स्तर पर लाने के लिए दीर्घकालिक उत्पादन‑उन्मुख सुधारों की आवश्यकता है।
भविष्य में, यदि सरकार रोजगार‑सृजन, सूक्ष्म‑उद्यमों के फाइनेंसिंग और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में अतिरिक्त निवेश करती है, तो वर्तमान स्थिरता को सतत विकास के पथ पर ले जाया जा सकता है। उपभोक्ता वर्ग के लिये भी कीमतों में स्थिरता, वैतनिक प्रतिस्पर्धा और वित्तीय समावेशन के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इस चरण में नीति‑निर्माताओं को केवल बफ़र बनाए रखने नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों को तेज़ी से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि भारत के आर्थिक प्रगति को वैश्विक अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखा जा सके।
Published: May 5, 2026