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Category: व्यापार

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भारत‑वियतनाम के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाकर 2030 तक $25 बिलियन व्यापार लक्ष्य

भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को Enhanced Comprehensive Strategic Partnership (विस्तारित व्यापक रणनीतिक भागीदारी) में बदलने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत 2030 तक दोनों देशों के बीच के एकीकरण वाले व्यापार को $25 बिलियन (लगभग 2.1 हजार करोड़ रुपये) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 2023‑24 वित्तीय वर्ष में दोनों देशों का व्यापार लगभग $19 बिलियन था, जिससे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वार्षिक औसत 3‑4 % की निरंतर वृद्धि आवश्यक होगी।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में रक्षा, प्रौद्योगिकी‑डिजिटल सेवाएँ और कृषि शामिल हैं। रक्षा क्षेत्र में भारत‑वियतनाम संयुक्त उत्पादन, उपकरण निर्यात‑आयात तथा औफसेट समझौतों को तेज़ करने की योजना बना रहा है। यह भारत के घरेलू रक्षा उद्योग, विशेषकर हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफ़ॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक warfare सिस्टम के लिए नई बाजार‑संभावनाएँ खोल सकता है, पर साथ ही रक्षा खरीद के पारदर्शिता, मूल्य निर्धारण और वारंटी मानकों पर नियामक निगरानी की मांग भी बढ़ेगी।

प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं में सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष भारतीय सूचना‑प्रौद्योगिकी (आईटी) दिग्गजों—जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो—को वियतनाम के स्टार्ट‑अप पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। एआई‑आधारित कृषि समाधान, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म और 5G‑इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मुख्य एजेंडा के रूप में चुना गया है। हालांकि, डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा और क्रॉस‑बॉर्डर डेटा फ्लो पर दोनों देशों के अलग‑अलग नियम इस सहयोग की गति को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे नियामक संरेखण की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

कृषि क्षेत्र में लक्ष्य विशेष रूप से चावल, समुद्री उत्पाद, मसाले और फलों की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत बनाना है। भारत के प्यूरीफाइड राइस और वियतनाम के समुद्री अपस्केल्ड फ्रॉश्यू एक-दूसरे के प्रमुख निर्यात‑केंद्र बन सकते हैं। इस दिशा में दोनों देशों ने लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर—जैसे बंदरगाह आधुनिकीकरण, बहु‑मॉडल कार्गो नेटवर्क और कस्टम्स प्रक्रियाओं के सरलीकरण—पर भी कार्य योजना तैयार की है। यदि सफल रहा तो इससे निर्यात‑उत्पादकों, विशेषकर एग्री‑टेक स्टार्ट‑अप्स को उल्लेखनीय राजस्व वृद्धि और नई नौकरियों का सृजन हो सकता है।

बाजार पर प्रभाव को देखे तो भारतीय SMEs को वियतनामी बाजार में प्रवेश के लिए कमीनी लागत वाले टैरिफ़ और अनुकूल व्यापार प्रोटोकॉल का लाभ मिलेगा। वहीं, बढ़ते आयात से घरेलू कुछ उद्योगों (जैसे स्थानीय मछली‑परोस उत्पाद) को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विविधता और संभवतः कम कीमतों का लाभ मिल सकता है। कुल मिलाकर, दो‑तरफ़ा व्यापार वृद्धि भारतीय विदेशी मुद्रा आरक्षित में सकारात्मक लगाव डालने की संभावना रखती है, पर साथ ही व्यापार संतुलन में संभावित असंतुलन को भी संभालना पड़ेगा।

विनियमात्मक परिप्रेक्ष्य में, इन पहलों को मौजूदा भारत‑ASEAN सम्मिलित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के साथ समन्वयित करना आवश्यक होगा। गैर‑टैरिफ़ बाधाओं, तकनीकी मानकों और सुरक्षा समीक्षाओं को सरल बनाने के लिए कस्टम्स प्रक्रियाओं का डिजिटलकरण और मानकीकृत प्रमाणन प्रणाली का विकास अनिवार्य है। साथ ही, रक्षा अनुबंधों में पारदर्शिता बढ़ाने, मूल्य निर्धारण के स्वतंत्र ऑडिट और कॉर्पोरेट जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए सशक्त निगरानी प्रणाली की भी जरूरत होगी।

निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए इस साझेदारी की व्यावहारिक सीमा को समझना आवश्यक है। $25 बिलियन का लक्ष्य आर्थिक वाक्‍ये में आकर्षक है, पर वैश्विक आपूर्ति‑शृंखला में निरंतर अस्थिरता, कच्चे माल की कीमतों में उछाल और भू‑राजनीतिक तनाव जैसे कारक इसे जोखिम‑भरा बना सकते हैं। इसलिए, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध कार्य‑योजना, स्पष्ट माइलस्टोन और निरंतर निगरानी तंत्र जरूरी है।

सारांश में, भारत‑वियतनाम के बीच बढ़ी हुई रणनीतिक साझेदारी न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, बल्कि रक्षा, डिजिटल और कृषि क्षेत्रों में संभावित निवेश‑धारा को भी आकार दे रही है। यदि नियामक बाधाओं को समय पर सुलझाया जाए और कॉरपोरेट जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाए, तो यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, रोजगार सृजन और उपभोक्ता‑हित में सकारात्मक योगदान दे सकती है।

Published: May 6, 2026