विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
भारत-दक्षिण कोरिया व्यापार समझौते की समीक्षा मीटिंग 25 मई को निर्धारित
नई दिल्ली – भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2010 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) का वार्षिक समीक्षा सत्र 25 मई को आयोजित होने की संभावना है, यह रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ। दोनों पक्ष विमर्श के माध्यम से मौजूदा व्यापार‑वित्तीय संबंधों की प्रगति का आकलन करेंगे और अगले चरण के लिए टैरिफ, गैर‑टैरिफ बाधाओं तथा निवेश सहजता के प्रश्नों पर पुनः विचार करेंगे।
सीईपीए के तहत दोनों देशों के बीच कुल वस्तु व्यापार 2025 में लगभग 17 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँच गया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक घटक, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना‑प्रौद्योगिकी सेवाएँ प्रमुख आयाम बनते हैं। दक्षिण कोरिया भारत को लगभग 5% टैरिफ छूट प्रदान करता है, जबकि भारत ने कई कोरियन उत्पादों पर 10‑15% की सीमा शुल्क दर घटा दी है। यह द्विपक्षीय व्यापार वृद्धि भारत के निर्यात‑विकास लक्ष्य और “मेक इन इंडिया” पहल के साथ संगत है, क्योंकि कई कोरियन फर्में भारत में उत्पादन आधार स्थापित कर रही हैं।
हालाँकि, दो साल पहले हुए समीक्षण में कुछ प्रमुख चुनौतियों को उजागर किया गया था। भारतीय निर्यातकों को कोरियन बाजार में तकनीकी मानकों और प्रमाणपत्रों की कठोरता के कारण प्रवेश में कठिनाई का सामना करना पड़ा है। वहीं, कोरियन कंपनियों ने भारतीय नियामक प्रक्रियाओं के समय‑सापेक्षता और स्थानीय प्रतिस्पर्धियों के अनुकूलन में बाधाएँ बताई हैं। इन मुद्दों का समाधान न होने पर व्यापार का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे भारत की व्यापार घाटे में वृद्धि हो सकती है।
रिव्यू मीटिंग में टैरिफ में और कटौती, को-रूटिंग सुविधा, और डिजिटल गैटवे के एकीकरण पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। यदि सत्र सफल होता है, तो उन क्षेत्रों में अतिरिक्त 1‑2 अरब डॉलर का व्यापार वॉल्यूमेंट उत्पन्न हो सकता है, जिससे निर्यात‑उन्मुख MSMEs को नई आय के स्रोत मिलेंगे। साथ ही, उपभोक्ताओं को सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और उच्च गुणवत्ता वाले औषधियों की उपलब्धता में संभावित लाभ दिखाई दे सकता है।
विपरीत रूप में, नियामक ढाँचा यदि पर्याप्त लचीलापन नहीं दिखाता तो निवेशकों की अपेक्षाएँ घट सकती हैं। दक्षिण कोरिया की फर्में भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आगे भी नीति‑प्रेरक सहायता चाहती हैं, विशेषकर इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कौशल विकास में। इसलिए, सरकार को नीतिगत स्थिरता, स्पष्ट मानक और पारदर्शी मुक़ाबला‑उपाय प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि कॉर्पोरेट जवाबदेही सुनिश्चित हो और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ साकार हो।
सारांशतः, 25 मई को होने वाली समीक्षा मीटिंग भारत की विदेशी व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इसका सफल परिणाम न केवल दोनो देशों के बीच व्यापार‑संबंधों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारतीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और उपभोक्ता हितों को भी विविधता के साथ सुदृढ़ करेगा। नियामक सुधार और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के बिना इस समझौते की पूरी क्षमता का उपयोग करना कठिन रहेगा।
Published: May 6, 2026