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भारत के कृषि‑मत्स्य निर्यात को वैश्विक बाजार में सशक्त बनाने हेतु SPS अनुमोदन रोडमैप पर चर्चा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के शोरूम में सोमवार को एक उच्च‑स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जहाँ वहन मंत्री पियूष गोयल ने भारतीय कृषि‑और‑मत्स्य उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) अनुमोदन प्राप्त करने के लिये एक विस्तृत कार्य‑योजना के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निर्यात में बाधा डालने वाले मानक‑आधारित बाधाओं को दूर कर, भारतीय उत्पादकों की आय बढ़ाना और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को आधुनिक बनाना है।
भौगोलिक विविधता और उत्पादन की वैरायटी को देखते हुए भारत विश्व के प्रमुख कृषि‑और‑मत्स्य निर्यातकों में से एक है, परन्तु कई प्रमुख बाजारों—जैसे यूरोपीय संघ, यूएसए और कुछ एशिया‑पैसिफिक देशों—में SPS मानकों की पूर्ति में कमी के कारण निर्यात को सीमित किया गया है। WTO के SPS समझौते की पूर्ति के लिये आवश्यक प्रमाणन, परीक्षण एवं निगरानी ढाँचे की कमी, छोटे‑छोटे उत्पादकों की तकनीकी असमर्थता और विफल बुनियादी संरचना इस समस्या के मुख्य कारण मानी जा रही हैं।
रोडमैप में प्रमुख कदमों के रूप में (i) राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्रमाणन प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, (ii) सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) के जरिए कोल्ड‑चेन और पैकेजिंग सुविधाओं का विस्तार, (iii) छोटे किसानों व मछुआरों को सशक्त बनाने हेतु प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता, तथा (iv) वस्तु‑विशिष्ट SPS अनुपालन हेतु एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थापना शामिल है। इन उपायों के लागु होने पर निर्यात मूल्य‑शृंखला में अनुमानित 10‑15% की वृद्धि और 2027‑28 वित्तीय वर्ष तक कृषि‑मत्स्य निर्यात में लगभग $7‑8 बिलियन का संवर्धन हो सकता है, जैसा कि कई आर्थिक विश्लेषकों ने प्रतीक्षित किया है।
परंतु इस रणनीति की सफलता कई चुनौतियों से जुड़ी है। पहचाने गये बुनियादी ढाँचे की कमी को जल्दी से ठीक करना, विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण एवं तटीय इलाकों में, बड़े निवेश और सतत सरकारी सहयोग की माँग करता है। साथ ही, छोटे उत्पादकों के लिये मानक‑अनुपालन की लागत को लेकर उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में गिरावट का जोखिम भी है। यदि सरकार इस खर्च को सब्सिडी या सस्ते लोन के माध्यम से नहीं संभालती, तो लाभ का बड़ा हिस्सा बड़े एग्री‑बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथ लग सकता है, जिससे असमानता बढ़ने की संभावना है।
उपभोक्ता हित के परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो SPS मानकों का पालन न केवल निर्यात को बढ़ाएगा, बल्कि घरेलू बाजार में खाद्य सुरक्षा के स्तर को भी सुदृढ़ करेगा। हालांकि, नियामक निकायों को इस प्रक्रिया में पारदर्शी कार्यवाही और तेज़ अनुमोदन समय‑सीमा सुनिश्चित करनी होगी, ताकि अनावश्यक देरी से उद्योग में निवेश की हिचक कम हो सके।
सारांश में, पियूष गोयल द्वारा प्रस्तुत यह रोडमैप भारतीय कृषि‑और‑मत्स्य निर्यात को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिये आवश्यक दिशा‑निर्देश प्रदान करता है, परंतु इसका वास्तविक प्रभाव तभी देखेगा जब बुनियादी ढाँचा, वित्तीय समर्थन और नियामक कार्यप्रणाली को समन्वित रूप से लागू किया जाये। राष्ट्रीय नीति‑निर्माताओं को इस अवसर को दीर्घकालिक सतत विकास और छोटे उत्पादकों के समावेशी उत्थान के साधन के रूप में देखना चाहिए, न कि केवल निर्यात आंकड़ों के अल्पकालिक बढ़ोतरी के रूप में।
Published: May 7, 2026