बैल्टिमोर के मेयर की खाली आवासों को घटाने की रणनीति: भारतीय शहरी नीति के लिए सबक
बैल्टिमोर, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रमुख महाद्वीपीय शहरों में से एक, लगातार बढ़ती खाली संपत्तियों की समस्या से जूझ रहा है। मेयर ब्रैंडन स्कॉट ने इस चुनौती का सामना करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं, जिनका लक्ष्य न सिर्फ शहर में खाली घरों की संख्या घटाना, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार करना है।
मुख्य उपायों में खाली घरों पर वार्षिक कर (vacancy tax) लगाना, पुनर्गठन और नवीनीकरण के लिये कम ब्याज दर पर वित्तीय समर्थन प्रदान करना, तथा निजी तथा गैर‑लाभकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी करके सामुदायिक आवास परियोजनाएँ तेज़ी से शुरू करना शामिल है। ये कदम पहले कुछ महीनों में लगभग 12 % खाली घरों की दर में गिरावट लाने में सफल रहे हैं, और शहर के अनउपयुक्त संपत्ति पोर्टफ़ोलियो को कम करने में मददगार सिद्ध हुए हैं।
भारत के कई बड़े शहरी क्षेत्रों में समान समस्याएँ देखी गई हैं—विशेषकर मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में अति‑उच्च भू‑भौतिकी के साथ कई फ्लैट और घर लंबे समय तक खाली पड़े रहते हैं। वर्तमान में भारत में खाली संपत्तियों पर कोई विशिष्ट कर नहीं है, और बुनियादी नियामक ढांचा अक्सर निर्माण की तेज़ गति के साथ ताल नहीं रख पाता। बैल्टिमोर के अनुभव से स्पष्ट होता है कि खाली घरों पर आर्थिक दायित्व लगाना, न केवल संपत्ति मालिकों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है, बल्कि शहर की निवासयोग्यता और रेंटल मार्केट की स्थिरता को भी सुदृढ़ कर सकता है।
हालाँकि, बैल्टिमोर में लागू किया गया ‘vacancy tax’ कुछ चुनौतियों से मुक्त नहीं है। छोटे निवेशकों को अत्यधिक वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है, और कुछ मामलों में यह अनजाने में आय उत्पन्न करने वाले छोटे व्यवसायों को बाधित कर सकता है। भारतीय संदर्भ में, समान नीति अपनाते समय छोटे मकान मालिकों और किरायेदारों के हितों का संतुलन बनाने हेतु छूट या वैकल्पिक प्रोत्साहन तंत्र की आवश्यकता होगी।
नियामकीय ढांचे की दृष्टि से, बैल्टिमोर की पहल ने सरकारी-निजी सहयोग (PPP) को प्रभावी रूप से उपयोग करने की महत्त्वपूर्ण सीख दी है। भारत में नगर निगमों और राज्य सरकारों को एकीकृत मंच स्थापित करना चाहिए, जहाँ खाली संपत्तियों की डेटाबेस बनाकर उनके पुनः उपयोग की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके। इसके साथ ही, पुनर्भरण के लिये फाइनैंसिंग मॉडलों में लघु अवधि के ब्याज दरों को घटाकर, रियल एस्टेट सैक्टर में रोजगार सृजन को बढ़ावा देना सम्भव है।
समग्र रूप से, बैल्टिमोर के मेयर स्कॉट की रणनीति यह दर्शाती है कि शहरी खाली घरों की समस्या को सिर्फ नियामक आदेशों से नहीं, बल्कि आर्थिक प्रोत्साहनों, कर एवं सामुदायिक भागीदारी के संतुलित मिश्रण से हल किया जा सकता है। भारतीय शहरों में इस प्रकार के बहुपक्षीय उपायों को अपनाने से न केवल आवास की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि अनौपचारिक बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होगा और समग्र शहरी विकास को तेज़ी मिलेगी।
Published: May 4, 2026